नगरीय निकाय प्रमुखों के पद के आरक्षण के साथ साथ रतलाम में भी राजनैतिक सरगर्मियां हुई तेज़..

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News By – विवेक चौधरी & नीरज बरमेचा 

बुधवार को भोपाल के रविन्द्र भवन में नगरीय निकाय के चुनाव में महापौर और अध्यक्ष पद का आरक्षण प्रक्रिया सम्पन्न हुई। इसके साथ ही प्रदेश में नगरीय निकायों की पार्टीगत राजनीति प्रारम्भ हो गई है। शिवराज सरकार ने कमलनाथ सरकार के निर्णय को उलट करते हुए यह तय किया था कि महापौर और अध्यक्ष सीधे जनता द्वारा चुने जाएंगे।सामान्य प्रक्रिया में यह चुनाव एक साल पहले होने थे जिसे लेकर कमलनाथ सरकार में कोई उत्सुकता नहीं दिखी थी, बाकि समय कोरोना संकट को भेंट चढ़ा। अब जल्द ही प्रदेश में 16 महापौर, 99 नगरपालिका अध्यक्ष और 292 नगरपरिषद अध्यक्ष के चुनाव हो सकते है। भोपाल में बुधवार को इन पदों के लिए आरक्षण तय होने के साथ साथ सभी जगहों पर स्थानीय राजनीति करने वाले नेताओं की राजनैतिक सरगर्मीयाँ भी तेज़ हो गई है।

आखिर कौन होगा नए साल में शहर का नया महापौर?

इस बार रतलाम नगर निगम महापौर का पद पिछड़ा वर्ग (मुक्त) के लिए आरक्षित हुआ है। इस आरक्षण के बाद इस वर्ग के नेताओं को अपना राजनैतिक भविष्य सुनहरा नज़र आने लगा है और टिकिट की दावेदारी तथा जुगाड़बाजी प्रारम्भ हो गई है। जबकि जो इस वर्ग से नहीं है उन्होंने अपने गुट के व्यक्ति के लिए लामबंदी करना शुरू कर दी है। पिछली बार महापौर पद अनारक्षित (सामान्य) महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था। जबकि वर्ष 2004 में आशा मौर्य ओबीसी महिला आरक्षित सीट होने से रतलाम महापौर बनी थी। रतलाम शहर के विभिन्न वार्डों के कुल मतदाताओं में लगभग एक चौथाई से ज्यादा इसी वर्ग से है। यह संख्या 55 हजार से ज्यादा बताई जा रही हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी में शहरी क्षेत्र के पिछड़े वर्ग वाले नेता अब टिकिट की दौड़ में अगड़े हो गए है।

भाजपा से महापौर की दौड़ में पुरुषो में पूर्व निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल, वर्तमान मिडिया प्रभारी अरुण राव, प्रवीण सोनी, पूर्व एम आई सी सदस्य सूरज जाट, पूर्व पार्षद प्रह्लाद पटेल, पूर्व निगम अध्यक्ष दिनेश पोरवाल, दिनेश सोलंकी, भाजपा युवा मौर्चा के पूर्व अध्यक्ष बलवंत भाटी, राजेंद्र राठौर, बद्रीलाल परिहार एवं महिलाओ में भाजपा नेत्री अनीता कटारिया, पूर्व महापौर आशा मौर्य सीमा टांक जैसे अनेक नेताओं के नाम सामने आ रहे है|

जबकि कांग्रेस से महापौर की दौड़ में मुबारिक खान, मयंक जाट, फैयाज़ मंसूरी, सुरेश जाट, राजीव रावत एवं प्रभु राठौड़ के नाम प्रमुख है।

पिछले कई बार से भाजपा ने महापौर की कुर्सी पर अपना कब्ज़ा जमा रखा है, अब देखना यह है की इस बार आने वाले नगरीय चुनाव में कौन किस तरह से बाजी मारेंगा, ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेंगा| लेकिन इस बार चुनाव के पहले के यह समीकरण भी बड़े दिलचस्प रहने वाले है|