News By – नीरज बरमेचा
- समाज सुधार का क्रांतिकारी अभियान उत्क्रांति उदघोष
पूज्य आचार्य भगवन 1008 श्री रामलाल जी म. सा. ने समाज में आई विकृतियों आडंबर प्रदर्शन को जड़ से समाप्त करने हेतु संघ समाज को एक क्रांतिकारी आयाम उत्क्रांति के रूप में प्रदान किया है ।
आज समाज में शादी समारोह व बड़े आयोजनों में सांस्कृतिक प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली प्रवृत्तियों , फूहड़ता , फिजूलखर्ची का चलन अंधाधुध बढ़ गया है। साधुमार्गी जैन संघ रतलाम ने गुरु आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए शासन दीपक श्री सुमित मुनि जी म. सा. की महती प्रेरणा से नववर्ष की शुरुआत उत्कृष्ट चारित्र वाले समाज की अद्भुत परिकल्पना उत्क्रांति उद्घोष के साथ की गई ।

एक आदर्श संघ की ओर अपने कदम बढ़ाते हुए संघ के शादी समारोह में प्री वेडिंग शूट, बैचलर पार्टी, आतिशबाजी, जमीकंद, , सचित फूल का उपयोग ,सड़कों पर नृत्य और महिला संगीत आदि पर पाबंदी, शादी समारोह के भोजन में 31 आयटम की मर्यादा जैसे अनेक सुधार वाला उत्क्रांति का उद्घोष समता भवन गोपाल गौशाला पर साधुमार्गी जैन संघ समता युवा संघ महिला मंडल बहुमंडल बालक व बालिका मंडल के पदाधिकारीगण व संघ के श्रावक श्राविकाओं की गरिमामय उपस्थिति में किया गया। इसके पूर्व प्रवचन सभा मे शाशन दीपक श्री सुमितमुनि जी म.सा. ने फरमाया कि भावना की पवित्रता, उद्देश्य की उच्चता , व प्रवृत्ति की निर्दोषता यह तीनों मिलती है तो हमारा आचरण श्रेष्ठ बनता है उत्क्रांति का उद्देश्य विशाल है। समाज की विकृति को बाहर करना है, हमारा लक्ष्य कर्तव्य पालन का बने। गुरु आज्ञा को मानकर आगे बढ़ना है ।

संघ अध्यक्ष ने जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि एक समाज एक सोच एक भविष्य की उत्कृष्ट सोच को आत्मसात कर साधुमार्गी संघ रतलाम पूरे समाज व सभी संघो को प्रेरणा प्रदान कर रहा है।

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Bahut hi behtar samachar pradan kiye jate he
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