श्रीमती लीला छाजेड ने स्वस्थ रहते हुए देहदान का दृढ़ संकल्प लेकर परिवारजनों को अपनी भावना से अवगत करवा दिया था। उनकी यह प्रबल भावना थी की उनका नश्वर शरीर समाज के काम आए। इसके बाद परिवारजनों ने काकानी सोश्यल वेलफेयर फाउंडेशन के माध्यम से देहदान हेतु पंजीयन करा दिया था। फाउंडेशन के गोविंद काकानी ने बताया कि रविवार को जब श्रीमती छाजेड ने शरीर का त्याग किया, तब वे धार्मिक आयोजन में व्यस्त थे और मेडिकल कालेज में अवकाश के कारण स्टाफ कम था, लेकिन बावजूद इसके देहदान की प्रक्रिया पूरी कर छाजेड परिवार ने शाम को श्रीमती छाजेड की अंतिम इच्छा अनुसार उनकी देह का दान कर दिया।परिवारजनों ने श्रीमती छाजेड के बीमारी के उपरांत निधन की दुःखद घड़ी में भी हिम्मत एवं साहस रखते हुए मेडिकल कॉलेज से चर्चा कर उनकी देह को वहां पहुंचकर कालेज प्रबंधन के सुपुर्द किया। देहदान से कालेज में चिकित्सकों और छात्र-छात्राओं को देह पर रिसर्च एवं शोध करने के अवसर मिलेंगे और वे प्रयोग के माध्यम से इलाज की प्रक्रिया को समझने का प्रयास करेंगे। छाजेड़ परिवार के अनुज छाजेड़ और वीणा छाजेड़ भी देहदान की घोषणा कर चुके है। इस़ परिवार द्वारा सामाजिक सरोकार की दिशा में किया गया यह प्रयास सराहनीय, अनुकरणीय ही नहीं वंदनीय है।
कोरोना काल के बाद मेडिकल कालेज को स्व. श्रीमती लीला छाजेड का तीसरा देहदान..
रतलाम,09 अक्टूबर। स्वर्गीय आनंद सिंह छाजेड़ की पुत्रवधु एवं समाजसेवी सुशील छाजेड़ की धर्मपत्नि सौ. का. लीला छाजेड़ के दुखद निधन पर छाजेड़ परिवार ने देहदान कर अनुकरणीय कदम उठाया। कोरोना काल के बाद रतलाम के डॉ लक्ष्मी नारायण पांडे्य शासकीय मेडिकल कालेज को श्रीमती छाजेड के रूप में तीसरा देहदान मिला। इससे पहले वरिष्ठ पत्रकार शरद जोशी के परिवार ने उनके भाई और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सीमा अग्निहोत्री ने उनकी माताजी की देहदान कर आदर्श प्रस्तुत किया था।



