प्रत्याशी घोषणा में भाजपा आगे, क्या रतलाम में अबकी बार भैयाजी 56 हजार पार…

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News by – विवेक चौधरी

रतलाम। चुनाव आयोग द्वारा दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा करने के बाद से ही प्रदेश में चुनावी फ़ीवर चढ़ने लगा है। मध्यप्रदेश में एक ही चरण में चुनाव 17 नवंबर को होंगे जबकि उम्मीद यह थी कि चुनाव 2 चरण में हो सकते है। अधिक चरण में चुनाव होने से पार्टी के बड़े नेताओं को प्रचार के लिए ज्यादा जगह कवर करने को मिलती है लेकिन मात्र नक्सल प्रभाव वाले पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में दो चरण में 7 और 17 नवंबर को चुनाव होंगे, वो भी सुरक्षा की दृष्टि से। अन्य पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी एक ही चरण में 23 नवंबर को चुनाव हो जाएंगे। यद्धपि उस दिन देवप्रबोधिनी एकादशी (देवउठनी ग्यारस) होने की वजह से मतदान का दिन बदलने की बात हो रही है तथापि यह तय चुनाव आयोग को करना है कि वो इस मांग पर क्या निर्णय लेता है। वैसे इन तीनो राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और काँग्रेस पार्टी आमने सामने की लड़ाई में है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में काँग्रेस का शासन है जबकि मध्यप्रदेश में लंबे समय से भाजपा के शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री है।

उम्मीदवारों की घोषणा में भाजपा को बढ़त

बहरहाल चुनावी आचार संहिता लागू होते ही भाजपा ने मध्यप्रदेश के लिए अपनी चौथी सूची जारी कर दी। जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित जीते हुए मंत्रियों विधायको पर विश्वास जताया। इनमें नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव जैसे नाम भी है। जबकि आचार संहिता लागू होने के पूर्व ही भाजपा ने अप्रत्याशित रूप से अपने उम्मीदवारों के नाम जारी करने शुरू कर दिए थे। जिनमें कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और नरेंद्र सिंह तोमर जैसे बड़े नाम थे। सबसे पहले सूची में हारी हुई सीटों पर जबकि चौथी सूची में जीती हुई सीटों के उम्मीदवारों पर फोकस रहा। वहीं काँग्रेस की पहली सूची की प्रतीक्षा अभी भी की जा रही है। उम्मीदवारों की घोषणा में भाजपा ने बाजी मारी है। इससे लगता है कि भाजपा का केंद्रीय संगठन चुनावों को लेकर कोई कसर छोड़ना नहीं चाहता है। राजनैतिक विश्लेषक इसे रणनीतिक बढ़त मान रहें है। लेकिन राजनीति में निर्णय आने के पहले कुछ भी संभव है।

रतलाम जिले में अभी तक 2 उम्मीदवार घोषित

रतलाम जिले की बात करें तो सबसे पहले भाजपा ने सैलाना सीट से भाजपा की पूर्व विधायक संगीता चारेल को उम्मीदवार बनाया। उनका मुकाबला काँग्रेस के मौजूदा विधायक हर्षविजय गहलोत गुड्डू भैया से संभावित है। हालाँकि अभी काँग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की कोई भी सूची जारी नहीं की है लेकिन सैलाना में काँग्रेस के लिए हर्षविजय गेहलोत का विकल्प दिखता नज़र नहीं आ रहा है। वे लोकप्रिय भी और सक्रिय भी। रतलाम जिले में भाजपा की ओर से अगली घोषणा रतलाम शहर से मौजूदा विधायक चेतन्य काश्यप के रूप में हुई। चेतन्य कश्यप पर भाजपा ने लगातार तीसरी बार विश्वास जताया है। वो लगातार दो बार 40 हजार से ज्यादा के अंतर से चुनाव जीते है। पिछले चुनाव में भाजपा विरोधी लहर में भी उन्होंने अपनी जीत का अंतर 2013 के चुनाव की तुलना में बढ़ाया था। शायद इसीलिए अपने समर्थकों में भैयाजी के नाम से लोकप्रिय काश्यप के लिए “अबकी बार 56 हजार पार” के नारे लगने लगे है।

क्या भैयाजी अबकी बार 56 हजार पार होंगे?

भाजपा ने अपनी चौथी सूची में मौजूदा विधायकों पर विश्वास जताया है। प्रारंभिक तौर पर इन्हें उम्मीदवार बनाकर अपने प्रचार प्रसार के लिए पर्याप्त समय भी दे दिया है। इस सूची में रतलाम शहर से चेतन्य काश्यप भी शामिल है। उनके समर्थक उन्हें विकास पुरुष की तरह प्रस्तुत करते है और उनकी दूरदर्शिता से उनके जानने वाले भी कायल है। उनके कार्यकाल में शहर का विकास उनकी उपलब्धियों में शामिल है। विगत दिनों पार्टी में उनके विरोधी उनके टिकट मिलने पर संशय जताते रहे और मंदसौर से चुनाव लड़ने की अटकलों पर भी चर्चा कर रहे थे लेकिन पार्टी ने उनपर ही विश्वास जताया। वहीं प्रतिद्वंद्वी पार्टी काँग्रेस की ओर से कोई घोषणा नहीं हुई है। दावेदारी में मयंक जाट, प्रभु राठौड़, महेंद्र कटारिया, फ़ैयाज़ मंसूरी और पारस सकलेचा जैसे नेताओं के नाम प्रमुख रूप से लिए जा रहें है। लेकिन नाम तय नहीं होने से कोई भी खुलकर सामने नहीं आ पा रहा है। काँग्रेस से नाम घोषणा में देरी से भाजपा को प्रचार में बढ़त मिल रही है। यद्यपि काँग्रेस की ओर से कुछ दावेदारों ने सामाजिक आयोजनों के माध्यम अपनी बिछात बिछानी शुरू कर दी थी लेकिन नाम की घोषणा प्रत्याशी को हिम्मत देती है, जिसका अभाव महसूस किया जा रहा है। सूत्रों पर यक़ीन करें तो पार्टी के प्रमुख नेता राहुल गाँधी जोरशोर से जातिगत जनगणना का मुद्दा उठा रहें है, ऐसे में संभावना व्यक्त की जा रही है कि रतलाम शहर से ओबीसी, अल्पसंख्यक या आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार घोषित हो सकता है। बहरहाल घोषणा होने तक प्रतीक्षा ही अंतिम उपाय है तबतक भाजपा प्रत्याशी के समर्थक “भैयाजी पर भरोसा है” के नारे के साथ मैदान में आ गए है। लिहाजा भाजपा की थोड़ी बढ़त तो स्वाभाविक मानी जा सकती है। अब देखना यह है कि काँग्रेस अपने उम्मीदवार का नाम घोषित कर चेतन्य काश्यप भैयाजी के सामने किसे उतारती है|