News By – नीरज बरमेचा (93028 24420)
- आत्म युद्ध कर कषायों को जीते – आचार्य महाश्रमण
- रतलाम प्रवास का द्वितीय दिवस
रतलाम, 23 जून 2021 शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के रतलाम प्रवास के द्वितीय दिन, अमृत गार्डन का परिसर में सुबह से शाम तक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही रही| इससे ऐसा लगा है मानो कोई आध्यात्मिक मेला लगा हो। शहर के अनेक सामाजिक राजनितिक, प्रशासनिक आदि क्षेत्रों के गणमान्यजनों ने शांतिदूत के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने मंगल प्रवचन में प्रेरणा देते हुए कहा- संसार में युद्ध लड़े जाते हैं। युद्ध हिंसा पूर्ण है तो अध्यात्म से जुड़ा हुआ भी हो सकता है। दूसरे से लड़ने वाला तो मूढ़ होता है परंतु स्वयं से लड़ने वाला बुद्ध बन सकता है। जीवन में भीतर का युद्ध, आत्मयुद्ध भी जरूरी है। स्वयं के भीतर जो अशुभ योग है, कषाय है व्यक्ति उन से लड़े। कषाय कर्म बंधन का कारण बनते हैं। कषायों को शुभ योग से सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र से जीतने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्य श्री ने आगे कहा कि हमारे में कषाय मंदता की साधना होनी चाहिए। आक्रोश, अहंकार, लोभ आदि के भाव हमारे भीतर में नहीं होने चाहिए। किसी के भी प्रति मन में बुरा करने की भावना न हो। कर्मों के बंधन से हमारी आत्मा कैसे बचें इस पर ध्यान देना चाहिए। जीवन में पदार्थों का इस्तेमाल करना पड़ता है पर वह उपयोग ही रहे उपभोग ना बने। जीवन में कषाय अल्पीकरण की जितनी साधना होगी, आत्मा उतनी ही मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
इस अवसर पर ‘शासन श्री’ साध्वी श्री करुणाश्री जी की स्मृति सभा भी समायोजित हुई। आचार्यश्री ने उनकी आत्मा के प्रति मंगलकामना व्यक्त की।

रतलाम तेरापंथ सभा ने वर्ष 2024 के लिए गुरुदेव से रतलाम को चातुर्मास प्रदान करने की अपनी मांग को पुरजोर भावों के साथ प्रस्तुत किया। सभा की पुरजोर विनंती को सुनने के बाद आचार्य प्रवर ने रतलाम की सकारात्मक प्रस्तुति और मनोयोग को पूरी तरह परखा।आचार्य प्रवर ने रतलाम संघ के निवेदन का पूरा संज्ञान लिया और भावभरी प्रस्तुतियों की सराहना की|
विनंती के लिए आयोजित कार्यक्रम में गुरुभक्ति के साथ रतलाम तेरापंथ सभा के बालको से लेकर वरिष्ठजनों तक ने अपनी बात प्रभावी और तार्किक रूप से प्रस्तुत की। बालिकाओं से लेकर महिला मंडल ने भी चातुर्मास की मांग के पक्ष में लघु नाटिका का मंचन किया एवं भक्ति से परिपूर्ण गीतिकाएँ प्रस्तुत की। स्थानीय सभा के अध्यक्ष अशोक दख ने समस्त समाजजनों की और से पक्ष रखा। सीए गौरव गांधी ने तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास के साथ मय आंकड़ो के रतलाम का पक्ष रखा। गुरुदेव ने रतलाम के पक्ष को सापेक्ष भाव से लिया और फरमाया की आगे के चातुर्मासिक कार्यक्रम की घोषणा के समय रतलाम के पक्ष को ध्यान में रखा जाएगा।
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