किसके भरोसे है रतलाम यातायात व्यवस्था, कब सुधरेगा? पुलिस प्रशासन भी बेफिक्र और लापरवाह..

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News By – नीरज बरमेचा & विवेक चौधरी 

  • स्कूल बस हो या कॉलेज बस, खुलेआम सड़कों पर प्रेशर हॉर्न का उपयोग
  • कॉलोनियों में तेज गति से चल रहे है वाहन 
  • ब्लैक फिल्म चढ़ी गाड़िया शहरो में बेख़ौफ़ होकर घूम रही है 
  • शहर में वाहनों पर फैंसी नम्बर प्लेट का बढ़ता चलन 

रतलाम। कहने को तो रतलाम स्मार्ट सिटी की ओर कदम बढ़ा रही है लेकिन यहाँ की यातायात व्यवस्था की हालत बुरी होती जा रही है। ना तो जनप्रतिनिधि इसपर ध्यान दे रहे हैं और ना ही निगम एवं पुलिस प्रशासन इसको लेकर संजीदा नज़र आ रहा है। नए पुलिस कप्तान के आने के बाद इस ओर कुछ उम्मीद जगी थी, लेकिन रतलाम के यातायात में कुछ सकारात्मक सुधार होगा अभी वैसा कुछ होता हुआ दिख नहीं रह है। शहर में लंबे समय से बंद पड़े ट्रैफिक सिग्नल कब ठीक होंगे किसी को पता नहीं है। चौराहों पर यातायातकर्मियों का अभाव मुश्किलें बढ़ा रहा है। लगता है कि यातायात पुलिस वाले चालान काटने के लक्ष्य पूर्ति को ही अपना काम समझते है।

स्कूल बस हो या कॉलेज बस, इनके द्वारा खुलेआम सड़कों पर प्रेशर हॉर्न का उपयोग हो रहा है, कॉलोनियों में तेज गति से वाहन चलाये जाते है। जिसपर कोई लगाम नहीं है। दोपहिया और चार पहिया वाहनों ओर फैंसी नम्बर प्लेट, तेज़ आवाज़ वाले साइलेंसर, तेज़ गति से चलाने वाले युवा चालक सब मिलकर व्यवस्था को मुँह चिढ़ा रहे है। वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात करने वालो की तो पूछिए मत। क्या यातायात पुलिस का काम मात्र सड़क पर नो पार्किंग एरिया में खड़े वाहनों के टायर लॉक करना ही बचा है या शहर में पार्किंग व्यवस्था के लिए कोई उपाय खोजना भी है? दुकानों का सामान पार्किंग एरिया में जमा होता है और पार्किंग एरिया के वाहन सड़क पर। इसपर वोट बैंक के चक्कर मे फंसे नेतागण भी मौन हो जाते है। शहर में सड़कों पर लगने वाली सब्ज़ी मंडिया, ठेले और फल फ्रूट की दुकानें यातायात व्यवस्था बिगाड़ रही है, सड़को को संकरी कर रही है।

दुर्घटना को आमंत्रण के सिवाय इनके लिए कोई ठोस सुनियोजित ना तो यातायात पुलिस के पास दिख रही है और ना ही निगम प्रशासन के पास। जावरा फाटक अंडरब्रिज पर रॉंग साइड से वाहन ले जाने वालों के लिए बेरिकेड लगाकर इतिश्री कर लिया गया, लेकिन उसके बाद भी उल्लंघन करने वालों पर लगाम लगाने वाला कोई पुलिसकर्मी वहाँ नहीं होता है। राजस्व की दौड़ में अस्त व्यस्त निगम से शहर यातायात में कोई सुधार में कोई उम्मीद करना तो बेमानी ही है। आशा है कि पुलिस, प्रशासन, निगम और नेता मिलकर इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकालेंगे ताकि शहर की बढ़ती जनसंख्या के साथ बढ़ते वाहन और यातायात दबाव की अव्यवस्था से शहर को निजात मिले।

सालो से बंद पड़े दो बत्ती ट्रैफिक सिंग्नल


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