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बदलाव वाली कमलनाथ सरकार के मंत्रियों के बिगड़े बोल, जानिए क्या है मामला?

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News By – विवेक चौधरी

(www.newsindia365.com) “वक्त है बदलाव का के नारे के साथ प्रदेश की सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस सरकार अपने मंत्रियों के बिगड़े बोल से परेशान हैं। इस बार प्रदेश के दो बड़े मंत्रीयों के बिगड़े बोल से फिर मामला गड़बड़ाया है। जहाँ एक और समाज में शराब, बीड़ी, सिगरेट और तम्बाकू को प्रतिबंधित करने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार के जिम्मेदार मंत्री अपने बयानों से इनको बढ़ावा दे रहे हैं। रतलाम के सैलाना में प्रदेश के तेजतर्रार युवा नेता और उच्च शिक्षा एवं खेल मंत्री जीतू पटवारी ने सैलाना में शासकीय कार्यक्रम में अपने भाषण में आपत्तिजनक बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि शादी के समय कई तरह की व्यवस्था करनी पड़ती है। देसी विदेशी पिलाने की व्यवस्था करनी पड़ती है। इसके लिए पैसे की व्यवस्था कहां से होगी यह चिंता का विषय होता है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने भी इसके लिए व्यवस्था कर दी है। जीतू पटवारी मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि बढ़ाने की बात कह रहे थे। वे कांग्रेस की महत्वाकांक्षी किसान ऋण माफी योजना के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने रतलाम के सैलाना कस्बे में आए हुए थे।

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वहीं प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अपने बयान में कहा कि जो बुजुर्ग हो गए है किसान। जो काम करने के लायक नही है। और उनमें थोड़ी सी बीड़ी पीने, तंबाकू खाने की लत लग गई। अब वो कहाँ से पैसे लाये तो उसके पैसों की भी व्यवस्था हमने कर दी है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को हम पेंशन देंगे। प्रधुम्न सिंह तोमर भी शिवपुरी जिले में किसान ऋण माफी योजना के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थे। भाजपा ने इस मुद्दे को हाथों हाथ लपक लिया है। उसके नेता विजेश लुणावत में अपने ट्विटर अकाउंट से दोनों मंत्रियों के वीडियो पोस्ट करते हुए कटाक्ष किया कि धन्य हो कमलनाथ जी की सरकार, जो अब बुजुर्गों की बीड़ी तंबाकू तथा लड़कियों की शादी में देशी-विदेशी शराब पीने पिलाने की व्यवस्था कर रही है। उपरोक्त मंत्रियों के बयानों से प्रदेश सरकार की किरकिरी हो रही है तथा विपक्ष को सरकार के मजाक उड़ाने का एक बार फिर मौका मिल रहा है। आपको बता दे कि पहले भी किसान आंदोलन एवं सिंहस्थ घोटाले को लेकर सदन में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उनके मंत्री अपने ही पार्टी के वरिष्ठ नेता के रोष के शिकार हुए थे। जिससे आपसी गुटबाज़ी भी उभरकर सामने आई थी। 15 साल बाद शासन में आने तथा सत्ता के अनुभव की कमी वाले नेताओं के मंत्री बनने की वजह से कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार बार बार आलोचनाओं के निशाने पर आ जा रही है।

उसी प्रकार भारतीय सेना द्वारा किए गए एरियल स्ट्राइक के बाद जहाँ पक्ष एवं विपक्ष के नेताओं के बड़बोलेपन सेनाओं के पराक्रम की कीर्ति पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है वहीं पाकिस्तानी मीडिया एवं सेना इन बयानों को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रसारित कर रही है। एक ओर दिग्विजय सिंह, कपिल सिब्बल ममता बनर्जी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, नवजोत सिंह सिद्धू इत्यादि विपक्षी नेता अपने बयानों एवं ट्वीट से सेना की कार्यवाही पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सबूत मांग रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ सत्ताधारी नेता सर्जिकल स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बढ़ती हुई लोकप्रियता से से फूले नही समा रहे है और उटपटांग बयान दे रहे हैं। जबकि यह समय पक्ष और विपक्ष दोनों ही राजनीतिक पार्टियों के द्वारा परिपक्वता का परिचय देने का समय है। यह समय देश की एकता एवं अखंडता के लिए एक साथ आतंकी एवं विदेशी ताकतों से लोहा लेने का समय है। सफल विदेशी नीति के चलते जहां एक और विश्व के अधिकांश देश भारत के पक्ष में खड़े हैं। इस्लामिक देशों के संगठन के मंच पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारत का पक्ष मजबूती से रख रही है। वहीं दूसरी ओर देश के अंदर ही राजनैतिक पार्टियां अपनी अपनी रोटियां सेकने में लगी है।

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