“2 दिवसीय लॉकडाउन – समस्या या समाधान”, जानिए क्या है रतलामियों के मन की बात…

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News By – नीरज बरमेचा & विवेक चौधरी 

“2 दिवसीय लॉकडाउन – समस्या या समाधान” विषय पर न्यूज़ इंडिया 365 द्वारा अपने पाठकों के बहुमूल्य विचारों को आमंत्रित किया था, जिसका उत्साहजनक परिणाम देखने को मिला। पाठकों ने लॉकडाउन से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए, अपनी समस्याएँ बताई, सुझाव बताए। जिसे आपके साथ साझा किया जा रहा है। ये उनकी अपनी विचाराभिव्यक्ति है जो कोरोना महामारी के दूसरे दौर में व्यक्त की जा रही है। निश्चित ही एक सामान्य व्यक्ति इस महामारी से कहीं न कहीं परेशान हुआ लेकिन उसने हार नहीं मानी है। आइए जानते है जन के मन की बात……….

संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए निश्चित रूप से लाॅकडाउन एक बेहतर तरीका है लेकिन एकमात्र तरीका नहीं है। कोरोना के प्रभाव से बचने के लिए लाॅकडाउन को साधन बनाया जा रहा है लेकिन लाॅकडाउन के प्रभावों से किस तरह जनता को बचाया जाए इस हेतु रणनीति का अभाव है। विगत वर्ष से अब तक आम आदमी की आर्थिक स्थिति चरमरा चुकी है। मध्यमवर्गीय व्यवसायियों, निजी कर्मचारियों, निजी शिक्षण संस्थाओं के समक्ष तो उनके अस्तित्व का प्रश्न है। बेरोजगार युवा जो लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है, परिक्षाओं के स्थगन से हताश है और मानसिक प्रताड़ना झेलने को मजबूर हो रहा है। लाॅकडाउन एक प्रकार से रीढ़ की हड्डी तोड़ रहा है जिसके उपचार पर कोई बात नहीं कर रहा है। आवश्यकता इस बात है कि त्वरित टीकाकरण कर पर्सनल डिस्टेंसिंग, मास्क के प्रयोग को रोज़मर्रा के जीवन में शामिल किया जाए तथा उचित सीमाओं में अर्थव्यवस्था को गतिशील रखा जाए। अमित छजलानी – प्रबंधक यूको बैंक


लाकडाउन एक सार्थक पहल है। निश्चित ही इससे कोरोना संक्रमण के रोकथाम में कुछ हद तक सफलता प्राप्त होगी। बाल्य जीवन में माता पिता एवं शिक्षक व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन में एक आदर्श होते है तथा बड़े होने पर राजनेता ,क्रिकेटर, एवं फिल्म स्टार। येन केन चुनाव को ही अपना राष्ट्र धर्म मानने वाले , दोहरे चरित्री राजनेता जब तक कोरॉना रोकथाम की पहल मास्क, दो गज दूरी और सेनिटाइजेशन का पालन नहीं करेंगे तब तक सभी प्रयास छोटे ही साबित होंगे। ।। जब तक दवाई नही, ढिलाई नही ।। 
प्रतीक मजावदिया – अध्यक्ष – अखिल भारतीय पोरवाल सोशल ग्रुप रतलाम


न्यूज इंडिया 365-खबरों का फीवर ने सही विषय पर आम जनता की राय ली, जो रोज कमाकर खा रहे हैं उनको बहुत गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता हैं प्रशासन सख्त निर्णय भी नही ले पा रहा हैं रोज नियम बदल रहे हैं सबसे पहले कानून कायदा ठोस हो। जिससे आमजन को भी समस्या ना हो। समस्या का समाधान तभी संभव हो सकता हैं जब प्रशासन किसी ठोस निर्णय को लेकर काम करे।
सौरभ छाजेड़ – पूर्व अध्यक्ष:- रोटरी क्लब रतलाम प्राइम


जिस प्रकार हर सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी प्रकार लॉक डाउन के भी दो पहलू है लॉकडाउन कहीं ना कहीं व्यापारियों और जनता के हित में तो नहीं है, लेकिन कोरोना जिस प्रकार गति पकड़ रहा है एवं लोगों द्वारा जानबूझकर या अनजाने में कई असावधानियां रखी जा रही है उन सभी के फलस्वरूप सरकार को दो दिवसीय लॉकडाउन लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है आवश्यक काम के लिये जनता को सरकार ने पहले भी छूट दी है लेकिन अनावश्यक घूमने वालों पर यह लॉक डाउन लगाम भी कसेगा।
अभिषेक लोढ़ा – संस्थापक सदस्य- संकल्प संस्था, सदस्य- जीव मैत्री परिवार


देश मे बढ़ते हालात को देखते हुए 2 दिन का लॉक डाउन लगाना ,समझ से परे है।
1. कारण लॉक डाउन का घोषणा होते ही बाजार में उमड़ पड़ी भीड़ और लॉक डाउन के के बाद बाजार में आने वाली भीड़ से खतरा कई गुना ज्यादा रहेगा ।
2. काला बाजारी अपने चरम पर पहुचने का उम्मीद है ।
राज बसु 


लॉकडाउन बेशक कोरोना की चेन को रोकने के लिये एक कारगर कदम है, लेकिन अब लॉकडाउन नही सख्ती के साथ मुँह पर मास्क लगाकर मास्क की आवश्यकता है
जीवन टैलर ग्राम बिलपांक किराना व्यापारी


दो दिवसीय लॉकडाउन किसी भी तरह से समाधान नही है अपितु यह एक समस्या है । इससे बाजार में और ज्यादा भीड़ बढ़ेगी और इससे दुकानदार और ग्राहक दोनो की समस्या बढ़ेगी। इसके बजाए प्रशासन को न तो लॉक डाउन लगाना चाहिए और ना ही नाईट कर्फ्यू । बस भीड़ इकट्ठा न हो इसका ध्यान रखना चाहिए। बाजार में खरीददारी के लिए पर्याप्त समय रहेगा तो भीड़ की स्थिति नही बनेगी एवम लोगो को अपना अपना रोजी रोजगार भी मिलता रहेगा वरना लोग बीमारी से बाद में पहले आर्थिक तंगी से परेशान है और ज्यादा हो जाएंगे।- भरत सोनी



दो दिवसीय लोक डॉउन एक समस्या ही है यह किसी भी बीमारी का समाधान नहीं हो सकता । लोक डॉउन के कारण निम्न एवं मध्यम वर्ग के लोगों का जीवन कितना प्रभावित होता है यह हम सब जानते हैं लॉकडाउन का असर सिर्फ और सिर्फ निम्न वर्ग पर ही होता है जो व्यक्ति रोज कमाकर रोज खाते हैं उनके हिस्से में सिर्फ और सिर्फ भूखी आती है इसके साथ ही प्रशासन द्वारा मनमर्जी से सरेराह उन लोगों की पिटाई की जाती है जो जैसे तैसे अपने घर वालों का पेट भरने के लिए निकलते हैं मेरे विचार में लॉकडाउन सिर्फ और सिर्फ एक समस्या ही है।
आशीष कुमार राणावत – अध्यक्ष

सहयोग एक सेवा संस्था , शुभम रेसीडेंसी रतलाम


दो दिवसीय लॉकडाउन से सिर्फ समस्या ही पैदा होंगी क्योंकि जैसे ही लॉक डाउन खुलेगा वैसे ही दुगुनी भीड़ बाज़ारो मे बढ़ेगी लोग अपने आप को दो दिन तक बंद तो रख सकते है पर तीसरे दिन घर से बाहर निकलने से अपने आपन को नहीं रोक पाएंगे और भीड़ बढ़ेगी तो संक्रमण भी बढ़ेगा| 
मोहम्मद अफसार


लॉकडाउन किसी भी समस्या का हल नही है । बाजार का समय कम करने में ही भलाई है। सुबह 6 से 8 दूध का व्यापार खुले 10 बजे से शाम 6 बजे तक सभी व्यापार खुले व तत्पश्चात 7 से9 तक दूध की सप्लाय करे, जिससे संक्रमण कि चेन टूट सकती है|  कमल गुरनानी – अम्बेडकर मंडल कार्यलय मंत्री


लॉकडाउन अभी तक तो एक विकल्प है लेकिन इससे अच्छा होता जनता पर ज़्यादा से ज़्यादा जोर देने का और जागरूक करने का ताकि इससे रतलाम माध्यम वर्ग एवम मज़दूर वर्ग परेशान ना हो और उसकी जीविका चलती रहे| 
खुर्शीद अली शाहकसारा बाजार रतलाम


दो दिवसीय लॉक डाउन समस्या का अस्थायी समाधान, पिछले कुछ दिनों में जिस तेजी से संक्रमण की दर बड़ी है यह तय हे की कोरोना का स्थायी समाधान स्वयं द्वारा रखी जाने वाली सावधानी और वैक्सीन ही है। मेरा मास्क मेरी सुरक्षा और सामाजिक दूरी के साथ अधिक से अधिक टिकाकरण द्वारा ही इस महामारी को फैलने से कम किया जा सकता है। कल दोपहर में जैसे ही 2 दिनों के लॉकडाउन की जानकारी लगी तब से रात तक बाजारों में बढ़ी भीड़ ने कोरोना का समाधान करने के बजाए खुद और प्रशासन के लिये समस्या बढ़ाने का ही काम किया होगा।

मेरा रतलाम सीए ब्रांच और प्रत्येक सदस्य की और से शहर वासियों से विनम्र आग्रह है कि मास्क का उपयोग, सामाजिक दूरी का पालन और अधिक से अधिक टीकाकरण में साथ देकर खुद के परिवार के और शहर के हित मे अपना सहयोग देवे।
सीए दिपेन्द्र चोपड़ा – चेयरमैन, रतलाम ब्रांच ऑफ आईंसीएआई


 

लोकडाउन कोई उपाय नही हे ,सरकार को बाजार मे भीड कम करने पर काम करना चाहिए ना की सबकुछ बन्द करने पर। जैसे कुछ वयवसाय खुले रखे ओर जो आज बंद हे उन्हे अगले दिन खुले रखे। सरकार को आम लोगो के बीच भी सामन्जस्य बिठा कर रखना चाहिये। अब ये कैसा निर्णय हुवा के दुध की दुकान बंद रहेगी ओर दारु की खुली रहेगी।

डॉ ईश्वर पाटीदार – चिकित्सक एवं व्यवसायी


इस कोरोना काल मे दो दीन का लाकडाउन काफी हद तक कोरोना को रोकने में मददगार साबित होगा लेकिन हमे ऊन लोगो का ख्याल रखना होगा जो रोजाना कमाते है ओर खाते है।
लोकेन्द्र सिंह चौहान – ऊप प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक


लॉकडाउन एक ऐसी समस्या है जिसका मात्र एक ही उपाय मास्क के लिए कठोरता पूर्वक नियम बनाए जाए|
रशीद कुरेशी – एमआर यूनियन सचिव


दो दिवसीय लॉकडाऊन समस्या भी है , समाधान भी।
समस्या उन लोगों के लिए हैं जो कोविड गाइड लाइन का पालन करने के बाद भी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं एवं जिन्हें दैनिक जीवन यापन करने में परेशान होना पड़ रहा है।समाधान उनके लिए हैं जो, कोविड महामारी को हल्के में ले रहे हैं और कोविड गाइड लाइन का पालन नहीं कर रहे हैं । जब तक इस प्रकार का व्यवहार रखने वाले लोग स्वानुशासित नही होंगे, प्रशासन के पास मजबूरन लॉकडाऊन लगाने एवं सख्ती करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं हो सकता है। कोवीड महामारी से बचने का एक मात्र विकल्प स्वानुशासन ही है।
अमरपाल सिंह वाधवा
व्यवसाय: व्यापार


दिन-रात सिर्फ कोरोना से संबधित खबरें लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रही हैं, और कई लोग डिप्रेशन का शिकार भी हो रहे हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान तो हो ही रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान रोजमर्रा के काम कर अपने घर का पेट पालने वालों को हो रहा है। और आम जनता को सबसे ज्यादा क्रोधित करने वाली बात यह है कि, सरकार एक तरफ अपने निजी कामों के लिए कोरोना रोकथाम (सोशल डिस्टेंस, मास्क का पहनना जैसी सावधानीयों की) धज्जियां उड़ा देती है वहीं दूसरी तरफ आम लोगों को सिर्फ बिना मास्क के चालान बना दिया जाता है। – आमिर अंसारी


जी हाँ.. ! 2दिन का लॉकडाउन लगा कर कलेक्टर महोदय ने कुछ हद तक तो ठीक किया के लेकिन पूर्णतः नहीं.. | क्योंकि सिर्फ 2 दिन के लॉकडाउन को पब्लिक सिर्फ एक ब्रेक समझती है और समस्या को हल्के मै लेती है. | मेरा मानना है की लॉकडाउन लगाने से अच्छा जो बिना मास्क वालो से चालान काट रहे है उसकी राशि तीन गुना कर दे और उस रसीद पर लिखवा दे की अगर दुबारा चालान कटा तो सीधा जेल होंगी |ऐसा एक बार करके देखिये रिजल्ट दस गुना अच्छा होगा और घर का हर इंसान अपनों के पास होगा | – राज सेन


कुछ हद तक समाधान किन्तु रोज़ बाज़ार का समय कम करना चाहिये – आशिष घोटीकर – दवा व्यवसायी



लॉकडाऊन लगाना कोई समस्या का समाधान नही हे इस लॉक डाऊन से गरीब और मध्यमवर्गीय फेमेली को कितनी समस्या आती हे ये वही बता सकते हे जो रोज कमाते हे रोज खाते हे वौ इस लॉकडाऊन से परेशान हे पहले के लॉकडाऊन से ही जनता अभी तक उबर नही पाई हे सरकार को लॉकडाऊन नही लगाते हुए इस समस्या का समाधान डूडना चाहिए। – भूपेंद्र खंडेलवाल


लॉकडाउन का समाधान है कि शादी विवाह में कम से कम लोग इकट्ठे हो इसलिए जब भी कहीं कार्यक्रम हो तो 50-60 पुलिस वाले जाकर वहां पर खड़े हो जाए एवं स्ट्रिक्टली पब्लिक को कहे कि अगली बार भी आए तो आपको कंटेनमेंट जोन में रखेंगे इसी प्रकार मृत्यु के कार्यक्रम समय भी अधिक पब्लिक को वहां पर करना चाहिए इससे एकदम कम पब्लिक हो जाएगी अथवा शादी अथवा मृत्यु में आने वाले लोगों पर ही दो दो हजार की पेनल्टी लगाना चाहिए|
अभय सकलेचा, काटजू नगर रतलाम


लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है एक समस्या है मानव को खुद अनुशासन मैं रहना सिखना व दिन चरया मैं लाना होगा। लॉकडाउन से तो देश को पहले ही नुकसान हो चुका है अतः लॉकडाउन एक समस्या है| लॉकडाउन से देश के विकास मैं बाधा व मध्यम एवं मजदूर गरीब वर्ग को नुकसान होगा| – मनीष पंवार


पिछले 5 महीने के लॉकडाउन में इसका समाधान नही हुआ तो 2 दिन के लॉकडाउन से कोन सा समाधान हो जाएगा, इससे सिर्फ और सिर्फ हर दिन मजदूरी करने वाले का ही नुकसान होगा, सरकार का नही। – रवि गोराना


लॉकडाउन अगर समस्या का समाधान होता तो इतने महीने जो लॉकडाउन लगाया था उससे अब तक ये कोरोना नामक बीमारी का खात्मा हो जाना चाहिए था| इस बीमारी से छुटकारा पाने का एक सही उपाय है कि मास्क का उपयोग सख्ती से किया जाए| और मास्क पहनने के लिए गवर्मेंट लोगों को जागरूक करे| याद रहे जब लोग मास्क पहने तो बीमारी के संक्रमण से बचने के लिए पहने ना कि चालान के डर से| – जावेद जैदी


दो दिन का लॉकडाउन समस्या का हल नही है इसकी जगह रात्रि 7 बजे से लॉक डाउन होना चाहिए रोजाना 7 बजे के बाद किसी भी व्यक्ति को इतना काम मार्किट में नही होता है और यू तो 24 घंटे भी कम पड़ेंगे| अगर आप 7 बजे का लॉक डाउन कर देंगे तो शाम को जो लोग बिना मतलब के टाइम पास के लिए घूम रहे है वो सब बंद हो जाएंगे तो इससे रिजल्ट अच्छे आएंगे| – प्रवीण पटवा, धानमंडी रतलाम


जब तक घर को बंद नही करेंगे जिसके यहा करोना है तब तक शहर बन्द करने से कोई फायदा नही होगा| 
हर्षित लुनावत – कपड़ा व्यापारी


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