जब तक नहीं आएँगी समय पर रिपोर्ट, तब तक ऐसे ही बढ़ते रहेंगे रतलाम में मरीज…

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News By – नीरज बरमेचा

  • इंदौर, उज्जैन हो या रतलाम, अस्पतालों में बेड मिलना नहीं बचा आसान….

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने हर इंसान को परेशानी में डाल दिया है| कही ऑक्सीजन की कमी, तो कही डॉक्टरों की कमी, तो कही अस्पतालों में बेड नहीं है, तो कही इलाज के लिए आवश्यक दवाईयाँ उपलब्ध नहीं है| शायद इससे बुरी परिस्थितिया पहले किसी ने भी नहीं देखी होंगी? ऐसे में रतलाम के हालात भी जुदा नहीं है|

रतलाम में दिन प्रतिदिन कोरोना मरीजो का बढ़ना, शमशान में लकड़ियों का कम पड़ना, अस्पतालों में बेड फुल हो जाने के कारण रतलाम मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार का बन्द हो जाना जैसी कई नयी नयी चुनौतियां दस्तक दे रही है| 09 अप्रैल की शाम से लॉकडाउन लगाए जाने के बावजूद भी कोविड पॉजिटिव की दैनिक संख्या कभी शतक तो कभी दोहरा शतक लगा रही है|


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आखिर क्या वजह है इसकी…..

न्यूज़ इंडिया 365 द्वारा की गई पड़ताल में जो तथ्य सामने आए है, उसके अनुसार शायद रतलाम में कोरोना के संक्रमण प्रसार का सबसे बड़ा कारण है RT-PCR की जाँच के बाद रिपोर्ट का देरी से आना| जानकारों के अनुसार जब तक RT-PCR टेस्ट की रिपोर्ट अधिकतम 12 घंटे में मरीजो को नहीं मिलेगी तक तब इन्हीं लोगों के माध्यम से कोरोना के संक्रमण की संभावनाएं बनी रहेंगी| यदि इसे आसन भाषा में समझे तो एक संदिग्ध मरीज ने RT-PCR का सैंपल दिया वो सैंपल देकर अपनी रिपोर्ट की प्रतीक्षा करने लगता है। अब उसकी रिपोर्ट आने में रतलाम में कम से कम 3 से 4 दिन लग रहें है| ऐसे में यदि वो बिना लक्षणों वाला मरीज (asymptomatic) है और उसे बीमारी का संज्ञान नहीं है तो ना जाने कितने को संक्रमित करके नए मरीज बना रहा होगा? क्योंकि रिपोर्ट आने तक वह अपने आप को सामान्य समझकर आइसोलेट नहीं हुआ होगा। जिसके कारण यह संक्रमण की चैन ब्रेक होने का नाम ही नहीं ले रही है| जितने सैंपल प्रशासन अहमदाबाद की निजी लैब में भेजे जा रहें है, यदि प्रशासन सकारात्मक तरीके से चाहे तो उसी लागत में RT-PCR जाँच की नयी मशीन रतलाम मेडिकल कॉलेज में लगाई जा सकती है| ऐसे में रतलाम में RT-PCR के टेस्ट की क्षमता भी बढ़कर कम से कम 1200 सैंपल के आसपास हो जाएँगी|

निजी कलेक्शन सेंटर का अभाव

अभी तक रतलाम प्रशासन ने किसी निजी सेंटर को RT-PCR टेस्ट के कलेक्शन के लिए अनुमति नहीं दी है| ना ही रतलाम की कोई निजी लैब यह जाँच कर रही है। रतलाम में अभी कोरोना की सभी जाँच शासन के स्तर पर ही हो रही है, जिसके कारण सभी सैंपल का लोड मेडिकल कॉलेज ही जा रहा है और दवाब बढ़ने से रिपोर्ट में देरी हो रही है| बहरहाल प्रशासन को चाहिए कि कोरोना जाँच की संख्या बढ़ाने के साथ साथ उसकी रिपोर्ट को भी त्वरित गति से प्राप्त किया जाए ताकि मरीजों का उपचार भी तुरंत प्रारम्भ किया जा सके। विगत दिनों मेडिकल कॉलेज में उपचाररत एवं कोरोना मृतकों के परिजनों ने यह आरोप लगाए है कि 5-6 दिनों तक सैंपल नहीं लिए गए अथवा रिपोर्ट के अभाव में मरीज का समुचित उपचार प्रारम्भ ना हो सका है। मेडिकल कॉलेज के डीन के बदलने से मेडिकल कॉलेज का स्टाफ तो थोडा एक्टिव जरूर हुआ है लेकिन अब यह तो वक़्त ही बताएगा कि डीन के बदलने से सिस्टम बदला या सिस्टम के बदलने से डीन….? 


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1 टिप्पणी

  1. निरन्तर फेल रहे संक्रमण के चलते अब RTPCR व रेपिड एंटीजेन टेस्ट पर सरकार को बन्धन हटाना चाहिए । निजी लैब्स के लिए RTPCR TEST खोल देने चाहिए ।साथ ही रेपिड एंटीजन टेस्ट किट खुले बाजार में उपलब्ध कराना चाहिए। ताकि मरीज स्वयम भी चेक कर तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क कर इलाज करवा सके।

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