रतलाम जिले में कोरोना संक्रमण लगातार दोहरे शतक लगा रहा है, आप भी सावधान रहें…

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News by – विवेक चौधरी

रतलाम (रविवार)। दिनांक 24 अप्रैल (शनिवार) 2021 को देर रात प्राप्त कोरोना बुलेटिन के अनुसार जिले में कोरोना संक्रमण के 260 नए मामले मिले है जबकि इस जानलेवा वायरस ने 5 और लोगों की जान ले ली है। इस तरह जिले अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 9162 हो गई है तथा कोरोना मृतकों के आँकड़ा बढ़कर 166 हो गया है। वैसे सुखद यह भी है कि 24 अप्रैल को 170 संक्रमित स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किये गए है जबकि 1420 अभी भी उपचाररत है। संक्रमण का सर्वाधिक तीव्र एवं मारक प्रसार इस वर्ष अप्रैल माह में देखा गया है। बुलेटिन के अनुसार कल तक जिले के शासकीय मेडिकल कॉलेज की लैब से 786 सैंपल और सुपराटेक अहमदाबाद की लैब से 433 सैंपल अर्थात कुल 1200 से अधिक सैंपल की रिपोर्ट आना बाकि हैं। जिले में 9 अप्रैल की शाम से लॉक डाउन लागू है लेकिन लॉकडाउन में भी संक्रमण के भारी संख्या में मामले सामने आए है। इस समय संक्रमण का फैलाव देश के अधिकांश हिस्सों में चिंतनीय अवस्था मे है। अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और कुछ दवाइयों की कमी है। अतः न्यूज़ इंडिया 365 सभी से निवेदन करता है कि आप भी सावधान रहें। घर पर रहें और सुरक्षित रहें। कोविड बचाव के सभी दिशा निर्देशों का पालन करें। शासन द्वरा निर्देशित इम्म्युनिटी बूस्टर आदि का उपयोग अवश्य करें।

संक्रमण ब्रेक के लिए प्रभावी उपाय हो सकते है ये…

जिले में 9 अप्रैल की शाम से लॉक डाउन प्रभावी है लेकिन उसके बाद भी संक्रमण का अत्यधिक विस्तार चिंतनीय है। संक्रमण की चैन को ब्रेक करने में लॉक डाउन को अंतिम विकल्प के रूप में बताया जाता रहा है लेकिन यदि लॉक डाउन में भी संक्रमण का विस्तार हो तो परिस्थितियों का विश्लेषण और आकलन जरूरी हो जाता है। सूत्रों की माने तो लॉक डाउन में भी संक्रमण के विस्तार के कई कारण हो सकते है। जैसे कि अस्पतालों में बेड की कमी से मरीज और उनके परिजन जूझ रहे है। ऐसे में भर्ती होने के पूर्व तक परिजन सहयोगी मरीज के साथ उनकी सेवा सुश्रुषा में जुटे होकर संक्रमित होने की संभावना पैदा कर रहे है। जबकि संदिग्ध एवं घोषित पॉजिटिव को तुरंत आइसोलेट किया जाना आवश्यक है। दूसरा कारण रिपोर्ट में देरी का बताया जा रहा है। कोरोना की जाँच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। बड़ी संख्या में संक्रमण होने से रतलाम के सैंपल बाहर भी भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट में देरी होने से बिना लक्षणों वाले मरीज अपने को सामान्य समझते है, तथा लक्षणों वाले भी कई बार संक्रमण फैलाने में जाने अनजाने में सहयोगी बन जाते हैं। इसके उपाय के रूप में स्थानीय स्तर पर जाँचे बढ़ाना, आइसोलेशन सेंटर्स बढ़ाना इत्यादि कारगर हो सकते है। बड़ी संख्या में मरीजों के होने से प्रत्येक पर निगाहें रखना व्यवस्था के लिए संभव नहीं है, ऐसे में इनकी स्वयं की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है। कुछ हल्के लक्षण वाले मरीज स्वयं अथवा पॉजिटिव मरीजों के परिजन बाहर आना जाना कर रहे है, जो संक्रमण विस्तार का कारण हो सकते है।

अन्य एक महत्वपूर्ण कारण में नागरिकों द्वारा लॉकडाउन को गंभीरता से ना लेना बताया जा रहा है। आर्थिक समस्याओं के चलते अथवा “आपदा में अवसर” खोजते कुछ व्यापारी व्यवसायी स्वयं, अपने परिजनों, कर्मचारियों अथवा ग्राहकों के बीच संक्रमण विस्तार का कारण बन जाते है। हास्यास्पद स्थिति तो यह है कि कुछ लोग लॉकडाउन में भी मॉर्निंग वॉक, इवनिंग वॉक, मोहल्ला वॉक, मोहल्ला गोष्ठियों में व्यस्त है। शारीरिक दूरी, मास्क, सेनेटाइजर का प्रयोग औपचारिकता समझ रहे है। इन लोगों के लिए कटाक्ष “ठूकेगा इण्डिया तो ठीक होगा इण्डिया” सटीक हो सकता हैं। साथ ही ऐसे कई संक्रमित है जो प्रारंभिक लक्षणों को नजरंदाज कर तब अस्पतालों की राह पकड़ते है जब मामला बिगड़ जाता है। ये लोग स्वयं अपनी और अपनों की जान तो जोखिम में डालते ही है लेकिन साथ मे कोरोना योद्धा के रूप में लड़ रहे मेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे है। अतः सभी से पुनः निवेदन है कि शासन प्रशासन को सहयोग प्रदानकर बताए गए निर्देशों का पालन करें। इस जानलेवा महामारी के समाधान का हिस्सा बनें ना कि समस्या बढ़ाने का कारण।


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