क्या सिर्फ RT-PCR से हो रहे कोरोना टेस्ट? केंद्र और प्रदेश सरकार क्यों बैठी है आँखें मूँद…???

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News by – नीरज बरमेचा 

एक तरफ तो केंद्र एवं प्रदेश सरकार (लगभग सभी जगहों पर) कोरोना को लेकर हथेली पर चाँद दिखाने की कोशिश कर रही है| दूसरी लहर के लिए पूर्व तैयारियों में चूक के बाद केंद्र से लेकर प्रदेश तक का प्रशासन कही ना कही अपनी असफलता एवं नकारात्मक भूमिका में नजर आने लगी है| कोरोना से परेशान मरीज इंजेक्शन से शुरू होकर अब ऑक्सीजन की किल्लत से जूझ रहा है| संक्रमितों और मृतकों के आँकड़े बढ़ते जा रहें है| शमशान में लकड़ियों की कमी आने लगी है| लॉकडाउन की मियाद बढ़ती जा रही है और यह सब शायद जानते हुए भी अधिकारी वर्ग सारी असलियत बयां नहीं कर पा रहे है| और करे भी तो कैसे? नीचे ऊपर सभी जगह दबाव है।

आखिर कहाँ हो रही है चूक?

जब कोई कोरोना संदिग्ध मरीज RT-PCR का सैंपल देता है तो उससे पहले उसे आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और पता आदि सभी जानकारी डेस्क पर उपलब्ध करानी पड़ती है| और यह सम्पूर्ण डाटा राष्ट्रिय (ICMR Portal) पोर्टल पर प्रेषित (Update) हो जाता है| ICMR पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होने के बाद मरीज के द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर SRF ID मेसेज के द्वारा प्राप्त होती है| इसके आधार पर कोरोना पॉजिटिव – नेगेटिव का आकड़ा जिले से प्रदेश को और प्रदेश से केंद्र को पोर्टल पर दिखाई पड़ता है|

लेकिन ऐसे में कई संदिग्ध मरीज एवं उनके परिजन RT-PCR ना कराकर सीधे सीटी स्कैन सेंटर पर जाकर HR-CT करा लेते है| जहाँ पर ना तो कौ आधार कार्ड मांगा जाता है और ना ही कोई पीछे से फ़ोन कर के किसी प्रकार की पूछताछ करता है| ऐसे में केंद्र सरकार के पास जो डाटा पॉजिटिव और नेगेटिव का आता है उसमें हाई सीटी स्कैन स्कोर एवं लक्षण वालें कोरोना मरीज की जानकारी नहीं होती है। जिससे आँकड़े पूर्णतः सही नहीं होते है| क्योकि HRCT में आये कोविड स्कोर (इन्फेक्शन) के आधार पर घर में रहकर या तो नॉन कोविड वाले हॉस्पिटल में रहकर अपना इलाज सहजता से करा देता है| और उनका कोविड पोर्टल पर कोई अपडेट भी नहीं चड़ता है| इनके परिजन इनके सेवा टहल करने के साथ साथ बाहर भी आते जाते रहते है। जो संक्रमण की बड़ी वजह भी है।

क्या ये मुद्दे से सरकार प्रशासन से अछूते है? शायद इसका जवाब देने वालेअभी असहज स्थिति में है, किन्तु न्यूज़ इंडिया 365 ने इस मुद्दे को PMO और CMO तक पहुचाने की कोशिश जरुर की है|

आखिर क्या वजह है इसकी…

सूत्रों से जानकारी मिली है कि जनता के एक वर्ग का यह मानना है कि कोविड अस्पतालों में परिजनों को अपने मरीजों से नहीं मिलने दिया जाता है, जिससे उन्हें अपने मरीज की वस्तुस्थिति का सही सही पता नहीं चल पाता है। अस्पतालों में अव्यवस्थाओं एवं अनियमितताओं के समाचार भी चिंतनीय होते है। अतः परिजन मजबूरी में ही मरीजों को कोविड अस्पतालों में ले जाना चाहता है। अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड की कमी है जिससे चाहते हुए लोग आसानी से भर्ती नहीं हो पा रहे है। अस्पतालों में बढ़ते कोरोना मरीजों के दवाब की वजह से सभी मरीजों को ध्यान देना स्टाफ के लिए मुश्किल हो जाता है। अतः परिजन चेस्ट एक्सरे, सिटी स्कैन एवं पैथोलॉजी टेस्ट करवाकर घर ईलाज करवाना चाहता है। रतलाम जैसी जगहों पर RT-PCR शासकीय स्तर पर ही होते है। जहाँ लंबी लाइने लगी होती है। अतः यह कुछ लोगों को वैकल्पिक उपाय के लिए प्रेरित करता है। जिससे कुल संक्रमितों के वास्तविक आँकड़े शासन प्रशासन तक नहीं पहुँचते है।


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