उपचार के अभाव में जान गंवा बैठी युवा प्रतिभा, दुःखद पहलू यह कि बीच सड़क पर माँ और भाई की गोदी में तोड़ा दम…

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News By – विवेक चौधरी

रतलाम। कोरोना की दूरी लहर में मई माह का पहला मंगलवार शहर की युवा प्रतिभा के लिए “मंगलमय” साबित नहीं हो सका। आंखों में आंसू ला देने वाले एक घटनाक्रम में रतलाम के युवा अभिभाषक सुरेश डागर बीच सड़क पर अपनी माँ की गोद और भाई के कंधे का सहारा होते हुए भी अपने जीवन की जंग नहीं जीत पाए। दर्दनाक पहलू यह है कि सुरेश की माताजी और भाई अनिल बेबस सुरेश को दम तोड़ते देखते रह गए, और कुछ कर ना पाए। दिवंगत सुरेश डागर एक मृदुभाषी और प्रतिभावान अभिभाषक थे। रतलाम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हुए वे अपने सरल स्वभाव की वजह से अपने संगी साथियों में लोकप्रिय भी थे। हो सकता है युवा अभिभाषक सुरेश ने कोर्ट में अपने पक्षकारों के लिए कई केस जीते होंगे लेकिन मंगलवार को अपने ही जीवन की जंग जीत ना पाए। उपचार के अभाव में किसी का दम तोड़ना आज के सभ्य एवं उन्नत समाज पर एक बदनुमा दाग है। लेकिन कोरोना संक्रमण की इस दूसरी एवं जानलेवा लहर ने ऐसी अनेक घटनाओं से रूबरू कराया है जिससे यह स्पष्ट है कि मंनुष्य चाहे कितनी भी तरक्की कर ले लेलिन वह नियति के सामने बेबस ही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अभिभाषक सुरेश डागर का स्वास्थ्य खराब होने कारण उन्हें उनका भाई अनिल और माताजी बाइक पर बिठाकर उपचार की आशा में कोविड हॉस्पिटल शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम ले गए थे। जहाँ वो करीब 2 घंटे तक उपचार मिलने और भर्ती होने की आस में परेशान होते रहे। बताया जा रहा है कि वे आयुष अस्पताल भी गए थे जहाँ उन्हें ना बेड मिला और ना ही उपचार। मामला गंभीर होता देख सुरेश के भाई और माताजी उन्हें लेकर बाइक पर निजी चिकित्सालय ले जा रहे थे तभी सैलाना रोड स्थित श्रीराम मंदिर चौराहे पर सुरेश डागर ने बीच सड़क में बाइक पर ही दम तोड़ दिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने दर्दनाक हादसे के बाद एंबुलेंस की व्यवस्था कराकर शव को जिला अस्पताल भिजवाया। इस दुःखद वाकिये के पश्चात सुरेश के अभिभाषक साथियों में रोष व्याप्त है। हाइकोर्ट एडवोकेट गौरव पांचाल ने जबलपुर हाइकोर्ट के न्यायाधिपति को पत्र लिखा है और इस घटनाक्रम को कोर्ट की अवमानना बताया है। उन्होंने लिखा है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने आदेशित किया था कि उपचार के अभाव में कोई मृत्यु ना हो। अभिभाषक गौरव पांचाल ने रतलाम कलेक्टर, मेडिकल कॉलेज के डीन, सीएमएचओ तथा आयुष अस्पताल के विरुद्ध अवमानना का प्रकरण संस्थित करने का आग्रह किया है।


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