News By – नीरज बरमेचा
रतलाम। कोरोना की मारक और घातक साबित हुई दूसरी लहर के पश्चात अब तीसरी लहर की आशंका और अनिश्चितता के बीच शासन से लेकर समाज तक सहमा हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान सहित जिले के जिम्मेदार भी बार बार जनता को संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक कर रहे है। आवश्यकत प्रतिबंधात्मक कदम उठाने के साथ साथ मास्क और सेनेटाइजर के प्रयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशासन का अमला दल बनाकर मास्क ना पहनने वालों और सोशल डिस्टेंसिन्ग का उल्लंघन करने वालो के चालान काटे जा रहे है। कुछ जगहों पर दुकानों को भी सील किया गया है। कोविड 19 नामक इस बीमारी और उसके बदलते स्वरूप की वजह से निश्चित रूप से यह सब आवश्यक भी है। लेकिन बड़ा प्रश्न यह भी है कि क्या कोविड प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन करवाने वाले स्वयं भी इसका पालन करते है? क्या चालान वसूली करने वालों के यहाँ भी “दिया तले अँधेरा” है? या कहे कि ” सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का”
दूसरों को मास्क ना लगाने पर दंडित करने वाले, मनमाने तरीके से वसूली करने वाले खुद ही अपने विभाग में नियमों का सख्ती से पालन नहीं करवा पा रहे है। हमारी पड़ताल में रतलाम नगर निगम के के कार्यालयों में अनेक कर्मचारी बिना मास्क लगाए अथवा मास्क लटकाए नज़र आए। जब यह विभाग स्वयं नियमों का पालन ठीक से नहीं करता है तो इन्हें क्या इस बात का नैतिक अधिकार है कि आर्थिक मोर्चे पर जूझ रहे व्यापारियों को डराए धमकाए और मनमाने तरीके से वसूली करें?
अब रतलाम प्रशासन नगर निगम के इन कर्मचारियो से कितने रूपये की चालानी कार्यवाही करेंगा या नहीं करेगा, यह एक बड़ा विचारणीय प्रश्न होगा| और यदि करेगा तो रु 100, रु, 500 या फिर कर्मचारियो का एक दिन का वेतन कटेगा| क्योकि बिना मापदंडो के आम जनता को परेशान करना और उन पर कार्यवाही करना और स्वयं नियमो का पालन नहीं करना कहा तक उचित है| इसका जवाब तो प्रशासन के जिम्मेदार ही दे सकते है|
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