आखिर किस वजह से नाराज हुआ रतलाम का मीडिया परिवार मुख्यमंत्री शहर प्रवास के दौरान….

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News By – नीरज बरमेचा / विवेक चौधरी

रतलाम। गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का अचानक रतलाम प्रवास हुआ। इस प्रवास के दौरान हरबार की तरह दिखने वाली राजनैतिक हलचल का अभाव दिखा। शायद यह कोविड का असर रहा होगा। शहर के रणनीतिकार आपस में यह चर्चा करते हुए नज़र आए कि मुख्यमंत्री के अचानक रतलाम आने का सबब क्या है? यह प्रशासनिक दौरा था या राजनैतिक? कयास लगते रहे और आगे भी लगते रहेंगे। यद्दपि शिवराजसिंह चौहान की अपनी लोकप्रियता बरकरार है लेकिन इस प्रवास में मुख्यमंत्री कहीं कहीं औपचारिकता निभाते नजर आए। मंच पर भाजपा के वर्तमान एवं पूर्व विधायक उपस्थित थे। साथ ही कुछ अन्य भाजपा नेता भी मंचासीन थे। वहीं कुछ की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। मंच से दिए गए भाषणों में भी संक्षिप्तता नज़र आई। मुख्यमंत्री प्रवास में विधायक सभागृह पर सर्वाधिक समय दिया गया लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा ना तो वृक्षारोपण हुआ, ना ही सभागार के स्टॉल्स का अवलोकन किया गया। प्रशासन ने अपने स्तर पर तैयारियाँ तो की थी लेकिन या तो यह संवाद का अभाव था अथवा मुख्यमंत्री की इंदौर जाने की शीघ्रता, तैयारियाँ धरी रह गई और मायूसी हाथ लगी। जबकि अल्कापुरी वैक्सीनेशन सेंटर और लॉयन्स हॉल वैक्सीनेशन सेंटर पर तैयारियों में उत्साह नज़र आया।


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मंच के साइड में कुछ लोग मुख्यमंत्री से मिलने की आस में खड़े रह गए तो कुछ व्यवस्था में लगे पुलिसकर्मियों से बहस करते रहे। जब जिम्मेदारों से सूचना और आश्वासन के मिलने, प्रेस वार्ता की साज सज्जा होने के बाद भी मीडिया परिवार मुख्यमंत्री का इंतज़ार करता रह गया, तो बेचारी जनता को कौन पूछे? मुख्यमंत्री प्रवास के प्रारंभ में ही मीडिया उपेक्षा और पीड़ा का शिकार हो गया। मीडिया की नाराजगी से स्थिति गंभीर हो सकती थी लेकिन जिलाधीश कुमार पुरुषोत्तम एवं पुलिस अधीक्षक ने प्रेमपूर्वक मीडियाकर्मियों को मना लिया। जुगाड़ और पहुँच का उपयोग कर रसूखदार से लेकर छुटभैये नेता हवाईपट्टी पर जा रहे थे तो कुछ दर्शकदीर्घा में मुख्यमंत्री की प्रतीक्षा में खड़े इन्हें देखते रहे। ऐसे में सारे नियम कायदे और जोर मीडियाकर्मियों पर दिखाने की कोशिश हो रही थी। मीडिया के मुख्यमंत्री के प्रवास के आगाज़ और अंत दोनों ही खटास भरा रहा। प्रवास के समापन में प्रेस वार्ता की प्रतीक्षा में बैठे मीडियाकर्मी उस समय हतप्रभ रह गए जब मुख्यमंत्री मंच से उतरकर प्रेसवार्ता स्थल पर जाने की बजाय बंजली हवाईपट्टी के लिए प्रस्थान कर गए। सत्ताधारी पार्टी और प्रशासन दोनों के लिए यह चिंतनीय विषय है कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की इस प्रकार की उपेक्षा कितनी उचित है?


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