News By – विवेक चौधरी
रतलाम। आगामी 16 सितंबर को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के रतलाम आगमन तय हो चुका हैं जिसका कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया हैं। वे निर्माणाधीन 8 लेन एक्सप्रेस वे की कार्य प्रगति का अवलोकन करेंगे। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को भी साइट विजिट प्रवास के लिए आमंत्रित किया है। नितिन गडकरी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता होने के साथ साथ प्रतिभावान नेतृत्वकर्ता के रूप में भी जाने जाते है। उनके माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ‘दिल्ली मुम्बई 8 लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे’ एक महत्वाकांक्षी योजना एवं काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुखद यह है कि कोरोनकाल में अनेकों योजनाएं प्रभावित हुई है लेकिन बाधाओं के बावजूद इस एक्सप्रेस वे का काम लगातार चल रहा है। आशा है कि वर्ष 2023 में हम सब इस महत्वकांक्षी परियोजना का लाभ ले सकेंगे। लगभग 1350 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे बनने से क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा, जबकि मध्यप्रदेश में 245 किमी इसकी लंबाई रहेगी। इससे दिल्ली मुम्बई के बीच यात्रा में लगने वाला समय लगभग आधा हो जाएगा। समय और ईंधन की बचत के साथ साथ प्रदूषण भी कम होगा। इस 8 लेन हाईवे को अत्याधुनिक तकनीक से बनाया जा रहा है। इस परियोजना की कुल लागत 90 हजार करोड़ रुपये की है। जिसमें से 11 हजार करोड़ से अधिक की राशि मध्यप्रदेश में खर्च होगी।

रतलाम जिले की आशा और अपेक्षाएं
वर्तमान में दिल्ली और मुम्बई के बीच सर्वाधिक माल परिवहन होता है। रतलाम से गुजरने वाले 4 लेन हाईवे को भी दिल्ली मुम्बई के बीच शॉर्टकट माना जाता है। यहाँ पर माल परिवहन परियोजना की प्रचुर संभावना है। 8 लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के साथ साथ रतलाम को लॉजिस्टिक हब की भी सौगात मिली है। जिले की अपेक्षा है कि जैसे देवास उज्जैन आगर गरोठ 4 लेन मार्ग का प्रस्ताव है, उसी तरह से उज्जैन नागदा जावरा तथा बाँसवाड़ा रतलाम 4 लेन हाइवे भी होना चाहिए। भविष्य में एक्सप्रेस वे पर जाने के लिए इन जगहों से रतलाम के लिए यातायात बढ़ेगा ही। बंजली सेजवाता बायपास पर भी दवाब बढ़ेगा उसके लिए इस साढ़े तीन किलोमीटर लंबे बायपास को फोरलेन में परिवर्तित किया जाना चाहिए तथा इसकी रेलवे क्रोसिंग पर ओवरब्रिज पर विचार होना आवश्यक है। यह बायपास शहर को संभावित यातायात दबाव से भी बचाएगा।
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रतलाम में भी मांग उठना शुरू हुई
नितिन गडकरी के प्रवास को देखते हुए कुछ राजनैतिक हलचल भी शुरू हो गई हैं। रतलाम शहर की भाजपा नेत्री सीमा टांक ने रतलाम सैलाना मार्ग पर रतलाम से 8 लेन हाईवे तक तथा बंजली सेजवाता बायपास को फोरलेन बनाए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि एक्सप्रेस वे बनने से इनपर यातायात का दबाव बढ़ेगा, जिसकी पहल अभी होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने सांसद गुमान सिंह डामोर एवं नगर विधायक चैतन्य कश्यप सहित प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी दिया है। वहीं काँग्रेस एवं किसान नेता डी पी धाकड़ 8 लेन से जुड़े खेत के किसानों के साथ सुविधाओं की मांग कर रहे है, यात्रा कर रहे है। उनकी मांग है कि एक्सप्रेस वे निर्माण से किसानों को जलभराव एवं सर्विस रोड की अनुपलब्धता की समस्या आएगी जिसका उचित समाधान मिलना चाहिए।
जानिए दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस वे के बारे में
दिल्ली-मुंबई ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे होगा, जो कि आधा दर्जन राज्यों से गुजरेगा। बताया जा रहा है कि मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी व्यक्तिगत रूप से मॉनिटर कर रहे है। उनके अनुसार तमाम बाधाओं के बावजूद इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके 2023 तक पूरा हो जाने की आशा है। अनुमान के हिसाब से यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली-मुंबई के बीच की यात्रा में लगने वाले समय को घटाकर लगभग आधा कर देगा। इस सड़क मार्ग पर निजी वाहनों का प्रयोग बढ़ेगा जिससे समय की बचत के साथ साथ ट्रेनों पर भी दबाव कम होगा। वर्तमान में दिल्ली से मुम्बई का जो राजमार्ग उस पर बहुत अधिक दबाव है। और यदि इस मार्ग पर भूमि अधिग्रहण कर विस्तार किया जाता तो आम जनता को अधिक परेशानी होती और उसके साथ साथ परियोजना लागत बहुत ज्यादा हो जाती। इस दृष्टि से नए 8 लेन एक्सप्रेस वे परियोजना लाभदायक प्रतीत होती है। एक्सप्रेस वे के क्षेत्र में वृहद वृक्षारोपण, वाटर हार्वेस्टिंग तथा जंगली जानवरों के लिए ओवर पास बनाए जाएंगे।
दिल्ली-मुंबई ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के एलाइनमेंट गुरुग्राम के राजीव चौक से शुरू होकर मेवात, अलवर, कोटा,मन्दसौर, रतलाम, दाहोद, बड़ौदा, सूरत होते हुए मंबई में समाप्त होगा। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, यह 5 राज्यों के अति पिछड़े व आदिवासी क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इससे एक्सप्रेस वे के आसपास संसाधन जुटाने में आसानी होगी और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वर्तमान के नेशनल हाइवे पर दबाव अधिक है और यह शहरी क्षेत्र से गुजरता है।






