बैंकों के निजीकरण एवं बैंकिंग लॉ अमेंडमेंट बिल के विरोध में 16-17 दिसंबर को बैंको की देशव्यापी हड़ताल….

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News By – नीरज बरमेचा 

बैंकों के निजीकरण के विरोध में एवं बैंकिंग लॉ अमेंडमेंट बिल के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले पूरे देश में 16 एवं 17 दिसंबर की बैंकों की देशव्यापी हड़ताल का आवाहन किया गया है, जिसमें 10 लाख से अधिक बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी हिस्सा लेंगे एवं देशव्यापी हड़ताल करेंगे । 16 एवं 17 दिसंबर को होनेवाली देशव्यापी हड़ताल के पहले विभिन्न प्रकार के धरना, प्रदर्शन एवं आंदोलन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आवाहन पर किए जाएंगे, जो कि पूरे देश में होंगे ।


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यूनाइटेड फॉरम के विजय कुमार सोनी, राजेश तिवारी, हरीश यादव, प्रकाश अग्रवाल आदि ने इस संबंध में बताया कि बैंकों के निजीकरण होने पर आम व्यक्ति बैंकों की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो जाएगा एवं देश में पुनः पूंजीवाद हावी होने लगेगा । इसके अलावा निजी बैंकों की मनमानी अपने चरम पर पहुंच जाएगी तथा विभिन्न प्रकार के सर्विस चार्जेस आम जनता पर थोपे जा सकते हैं । इसी के साथ निजीकरण के चलते ओर भी कई प्रकार की समस्याएं कर्मचारियों, आमजन, किसानों, व्यापारियों आदि को हो सकती है । आंदोलन के अंतर्गत बैंकों की विभिन्न शाखाओं में आज 09 दिसम्बर को काले बेच पहनकर विरोध प्रदर्शन किया गया ।

निजिकरण के खिलाफ इस लड़ाई में आमजनता का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है । ज्ञातव्य है कि शासन की विभिन्न योजनाओं जैसे मुद्रा योजना, शासकीय योजनाएं, जनधन खाते, पीएम स्ट्रीट वेंडर योजना, सीएम रूरल हाउसिंग एवं अन्य सभी में भी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों ने सर्वाधिक योगदान दिया है एवं आमजनता को बैंकिंग सेवाएं मुहैया करवाई है । यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने आमजनता से भी अपील की है कि निजिकरण के खतरनाक दूरगामी परिणाम को देखते हुए इस लड़ाई में पुरजोर सहयोग करे और निजिकरण का विरोध करे ।बैंकों के निजीकरण के विरोध में एवं बैंकिंग लॉ अमेंडमेंट बिल के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले पूरे देश में 16 एवं 17 दिसंबर की बैंकों की देशव्यापी हड़ताल का आवाहन किया गया है, जिसमें 10 लाख से अधिक बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी हिस्सा लेंगे एवं देशव्यापी हड़ताल करेंगे । 16 एवं 17 दिसंबर को होनेवाली देशव्यापी हड़ताल के पहले विभिन्न प्रकार के धरना, प्रदर्शन एवं आंदोलन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आवाहन पर किए जाएंगे, जो कि पूरे देश में होंगे । यूनाइटेड फॉरम के विजय कुमार सोनी, राजेश तिवारी, हरीश यादव, प्रकाश अग्रवाल आदि ने इस संबंध में बताया कि बैंकों के निजीकरण होने पर आम व्यक्ति बैंकों की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो जाएगा एवं देश में पुनः पूंजीवाद हावी होने लगेगा । इसके अलावा निजी बैंकों की मनमानी अपने चरम पर पहुंच जाएगी तथा विभिन्न प्रकार के सर्विस चार्जेस आम जनता पर थोपे जा सकते हैं । इसी के साथ निजीकरण के चलते ओर भी कई प्रकार की समस्याएं कर्मचारियों, आमजन, किसानों, व्यापारियों आदि को हो सकती है । आंदोलन के अंतर्गत बैंकों की विभिन्न शाखाओं में आज 09 दिसम्बर को काले बेच पहनकर विरोध प्रदर्शन किया गया । निजिकरण के खिलाफ इस लड़ाई में आमजनता का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है । ज्ञातव्य है कि शासन की विभिन्न योजनाओं जैसे मुद्रा योजना, शासकीय योजनाएं, जनधन खाते, पीएम स्ट्रीट वेंडर योजना, सीएम रूरल हाउसिंग एवं अन्य सभी में भी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों ने सर्वाधिक योगदान दिया है एवं आमजनता को बैंकिंग सेवाएं मुहैया करवाई है । यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने आमजनता से भी अपील की है कि निजिकरण के खतरनाक दूरगामी परिणाम को देखते हुए इस लड़ाई में पुरजोर सहयोग करे और निजिकरण का विरोध करे ।


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