जानिए क्या कहता है रतलाम के नगरीय निकाय चुनाव को लेकर “न्यूज़ इण्डिया 365- रतलामी फीवर” का सर्वे….

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News By – Team न्यूज़ इण्डिया 365 – रतलामी फीवर

रतलाम। जैसे जैसे नगरीय निकाय के चुनाव की तारीखें पास आ रही है इसको लेकर राजनौतिक सरगर्मियां भी तेज होती जा रही है। पार्षद से लेकर अध्यक्ष महापौर तक के टिकट के लिए पार्टी दफ्तरों में घमासान हो रहा है। आवेदन की लंबी सूची बनती जा रही है। संभावित उम्मीदवार अपने संबंधों को खंगाल रहे है। वो अपने टिकट के लिए कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते है। लेकिन पार्टी करे तो भी क्या, क्योंकि टिकट तो किसी एक को ही मिल सकता है। और सभी पार्टी यही चाहती है कि उनके द्वारा चयनित प्रत्याशी चुनाव जीते। आखिर चुनाव जीतने के लिए ही तो लड़े जाते है, हारना कौन चाहेगा? जीत की समीकरणों से लेकर वरिष्ठों की पसंद और स्थानीय राजनीति में अपना अपना भविष्य ये सभी बातें चुनावी टिकट फाइनल करवाती है। राजनीति बड़ी बेरहम होती है इसके मैदान में लगे घाव आसानी से भरते नहीं और कोई भी घायल भूलता नहीं। बहरहाल रतलाम शहर में होने वाले नगर परिषद के चुनाव में जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश न्यूज़ इण्डिया 365 – रतलामी फीवर की टीम ने की। इसमें बड़े चौंकाने वाले रुझान सामने आए है। कुछ नाम तो चुनावी चौपालों और कुछ नाम पर्दे के पीछे कहे सुने जा रहे है। इन सभी नामों के समर्थकों के अपने अपने दावे है लेकिन चुनावी टिकिट और उसके बाद जनता के वोटों को कौन जीत पाता है यह तो समय ही बताएगा।

न्यूज़ इण्डिया 365 – रतलामी फीवर द्वारा अपने पाठकों के माध्यम से जनता के बीच एक सर्वे करवाया गया। जिसमें जनता ने अपना मत रखा। सर्वे में महापौर पद के लिए भाजपा को बड़े अंतर से पहली पसंद के रूप में देखा गया। लेकिन पिछली परिषद और पार्षद से जनता की नाराजगी नज़र आई। इसका बड़ा कारण पिछली परिषद के कार्यकाल खत्म होने के बाद चुनाव ना होना रहा है। इस दौरान नगर सरकार तो सरकारी नुमाइंदों के हाथ में थी, जिनके आगे क्षेत्रीय पार्षद सिर पटकते रहे लेकिन काम “सरकारी ढर्रे” पर चलता रहा। जिसकी नाराजगी पिछली परिषद के  खिलाफ सर्वे में नज़र आई। लेकिन सर्वे में महापौर की दौड़ में भाजपा का आगे होना जनता भी जनता का मत है। इसलिए कहा जाता है कि लोकतंत्र में जनता राजा होती है, भले ही चुनाव होने तक ही सही।

सर्वे में महापौर के लिए काँग्रेस प्रत्याशी की दौड़ में मयंक जाट सबसे आगे थे उनके पीछे राजीव रावत, मुबारिक खान और फ़ैयाज़ मंसूरी रहे। जबकि भाजपा प्रत्याशी के रूप में पूर्व निगम अध्यक्ष एवं युवा नेता अशोक पोरवाल सबसे आगे निकल गए। उसके बाद प्रहलाद पटेल, दिनेश राठौड़, बलवंत भाटी, प्रवीण सोनी और मोहनलाल मुरलीवाला जैसे नाम रहे। लेकिन भाजपा में टिकट वितरण का निर्णय अक्सर सरप्राइज देने वाले जैसा होता है। अंदर खाने में ऊपर तक पहुँच रखने वाले एक व्यवसायी और सेवा कार्य करने में अग्रणी रहने वाले सक्रिय सनातनी मोहन मुरलीवाला जैसे नाम भी चल रहे है। देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा चयन समिति को कौन सा नाम पसंद आएगा। वैसे विगत 3 पूर्व महापौर में शैलेन्द्र डागा की लोकप्रियता बरकरार है। बहरहाल नगर निगम के चुनाव सबसे दिलचस्प होते है। क्योंकि इसमें मतदाता शहरी और शिक्षित होता है। पार्षद के चुनाव में मतदाता पार्टी से ज्यादा काम करने वाले प्रत्याशी को महत्व देते है। वहीं महापौर का चुनाव शहर विधायक की ही तरह का होता है, जहाँ पार्टी और प्रत्याशी दोनों का सामान महत्व होता है।

सवाल न. 1 – “नगर निगम महापौर चुनाव में  भाजपा प्रत्याशी कौन होंगा?”


सवाल न. 2 – “नगर निगम महापौर चुनाव में  कांग्रेस प्रत्याशी कौन होंगा?”


सवाल न. 3 – “क्या आप पिछली निगम परिषद से संतुष्ट है?”  


सवाल न. 4 – “पिछले 3 निगम परिषदों में किस महापौर का कार्यकाल सबसे अच्छा रहा?”  


सवाल न. 5 – “क्या आपके वार्ड के भूतपूर्व पार्षद के कार्य से आप संतुष्ट है?”


सवाल न. 6  – आपके हिसाब से अगला महापौर किस पार्टी का होंगा?



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