लेबड नयागांव फोरलेन टोल वसूली पर याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस

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News By – विवेक चौधरी

रतलाम। रतलाम से गुजरने वाले लेबड़ नयागांव फोरलेन पर टोल वसूली को लेकर अक्सर चर्चा रहती है। यह चर्चा कभी बढ़ते हुए टोल राशि तो कभी रखरखाव के अभाव के बावजूद टोल वसूली तथा कभी ब्लैक स्पॉट जैसा रहा है। यद्यपि किसी जमाने में अत्यंत जर्जर एवं दयनीय अवस्था वाली यह रोड अब फोरलेन में होकर समय और साधन की बचत करवाती है। फिर भी कुछ मुद्दों और यह जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती है। इसी मार्ग पर टोल वसूली को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई हुई, जिसपर देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश माननीय चन्द्रचूड तथा न्यायाधीश माननीया हीमा कोहली की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका रतलाम के पूर्व महापौर एवं काँग्रेस नेता पारस सकलेचा ने दायर की हैं। वे उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज किये जाने के पश्चात सर्वोच्च अदालत गए थे।

क्या है याचिका का विषय

पारस सकलेचा ने बताया कि उनके द्वारा एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड डॉ.सर्वम रितम खरे के माध्यम से दायर विशेष अनुमति याचिका में उल्लिखित है कि जावरा-नयागांव रोड पर, वर्ष 2020 तक टोल टैक्स लगभग 1461 करोड़, जो कुल परियोजना लागत की तीन गुना से भी अधिक है, वसूला जा चुका है। कुल परियोजना लागत 471 करोड़ है। इसी प्रकार लेबड-जावरा सड़क पर, जिसकी परियोजना लागत 605 करोड़ थी, अब तक टोल 1325 करोड़ यानि परियोजना लागत का लगभग ढाई गुना वसूल किया जा चुका है। ठेके की अवधि 25 साल यानी 2033 तक है , और तब तक वसूला जाने वाला टोल कई गुना अधिक होगा जो जनता पर अत्यधिक और मनमाना कराधान है। तथा इन्डियन टोल एक्ट 1851के विपरीत है ।

उच्च न्यायालय ने खारिज की थी याचिका

सकलेचा ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के समक्ष एक रिट याचिका दायर की थी, जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। उस आदेश के खिलाफ, भारत के सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत द्वारा अधिवक्ताओं ओल्जो जोसेफ और डॉ. सर्वम रितम खरे की सहायता से की गई दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश चन्द्रचूड की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी कर प्रदेश सरकार से जवाब तलब की है। पारस सकलेचा के अनुसार इन दो सड़कों पर टोल संग्रह की चुनौती का असर पूरे मध्य प्रदेश में टोल टैक्स कलेक्शन और टोल नीति पर पड़ेगा, जिसे ठेकेदार के बजाय जनता के अनुकूल किया जाना चाहिए ।


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