News by – विवेक चौधरी
- रतलाम सहित मध्यप्रदेश के पांच शहर होंगे रैबीज फ्री, पॉयलेट प्रोजेक्ट के तहत जानवरों को लगेंगे इंजेक्शन
- जीव प्रेमियों की मांग और राज्य की रिपोर्ट पर केंद्र सरकार ने दिए आदेश
रतलाम। शहर में श्वानों के काटने से लोगों को होने वाले रैबीज रोग से बचाने के लिए व्यापक स्तर पर एंटी रैबीज ड्राईव का आयोजन किया जाएगा। जीव प्रेमियों की पहल पर यह आदेश केंद्र सरकार ने पारित किया है। केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के पांच शहरों को पॉयलेट प्रोजेक्ट के तहत चुना है जिसमें रतलाम भी शामिल हैं। इसके तहत जनवरी से श्वान, बिल्ली, बंदरों समेत कई जानवरों को इंजेक्शन लगाए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम और ग्वालियर शहरों में श्वानों की संख्या अधिक है। ऐसे में राज्य शासन के अधिकारियों द्वारा समस्या को सुलझाने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल के साथ ही एंटी रैबीज ड्राईव को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस रिपोर्ट को केंद्र की अनुमति के लिए भेजा गया था और अब केंद्र से भी अनुमति प्राप्त हो गई हैं। केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के पांच शहरों में यह अभियान चलाने पर अभिमत दिया है जिसमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम और ग्वालियर शामिल हैं। पांचों शहरों में पशु पालन विभाग, नगरीय निकाय और वन विभाग के सहयोग से श्वान, बिल्ली, बंदर आदि जानवरों को इंजेक्शन लगाए जाएंगे। नगर निगम द्वारा बजय अलॉट होते ही जनवरी से अभियान प्रारंभ हो जाएगा।
जीव प्रेमी कई वर्षो से कर रहे हैं मांग
रतलाम के जीव प्रेमियों ने 2021 में रैबीज अवेयरनेस डे पर जिला प्रशासन के साथ ही राज्य शासन को भी एंटी रैबीज वैक्सीनेशन ड्राइव पूरे राज्य में चलाने का प्रस्ताव दिया था। पशु चिकित्सालय के साथ मिलकर जीव प्रेमियों ने आयोजन कर जागरुकता की दिशा में काम भी प्रारंभ किया था। इसके बाद भी समय समय पर लगातार एंटी रैबीज ड्राइव चलाने की मांग की जा रही थी। हाल ही में रतलाम शहर के जीव प्रेमी हेमा हेमनानी, श्रेय सोनी, जीव मैत्री के पंकज मेहता आदि ने श्रीनगर क्षेत्र में पार्षद प्रतिनिधि कृष्णा सोनी के सहयोग से श्वानों को एंटी रैबीज इंजेक्शन भी लगवाए हैं। केंद्र शासन के अभियान के बाद यह पहल पूरे शहर में आसानी से चल सकेगी। इससे आम लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
क्या है केंद्र सरकार का आदेश
अधिवक्ता और एमिनल राईट एक्टिविस्ट शिल्पा जोशी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारत के सभी नगरीय निकायों को पहले से गाईडलाइन है कि शहरी सीमा में श्वानों की नसबंदी हेतु एबीसी कार्यक्रम का संचालन करें। इसमें इनकी गणना, सर्जरी और इसके बाद एंटी रैबीज वैक्सीन लगाने का प्रावधान हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में यह भी स्पष्ट है कि श्वान जिस गली मोहल्ले में जन्म लेते हैं उसे वहीं का मूल निवासी माना जाएगा। उन्हें सर्जरी के बाद या किसी भी अन्य अवस्था में उस गली, मोहल्ले से हटाया नहीं जा सकता है। परंतु अब केंद्र सरकार ने नए आदेश में मध्यप्रदेश के पांच शहरों में विशेष एंटी रैबीज अभियान चलाने को कहा है। इसके तहत सभी श्वानों को पृथक से एंटी रैबीज इंजेक्शन दिए जाएंगे। यदि अभियान सफलता के साथ पूरा होता है तो आम लोगों को रैबीज होने का खतरा नहीं रहेगा और श्वानों और इंसानों के बीच समन्वय भी बढ़ेगा।

जरा से प्रयास करें तो नहीं काटेंगे श्वान
रतलाम पशु चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि अमूमन 90 प्रतिशत श्वान लगातार भूखे रहने, प्यासे रहने, बैठने के लिए सूखे स्थान तक नहीं मिलने या कॉलोनी या मोहल्ले के लोगों द्वारा बार-बार पत्थर आदि मारने की दशा में ही काटते हैं। ऐसी परीस्थितियों में भी श्वान साल में दो बार मैटींग पीरियड के दौरान ही ज्यादा आक्रामक होते हैं। ऐसे में यदि मोहल्ले वाले उन्हें खाने को रोटी, पानी को थोड़ा सा पानी और जरा सा स्थान बैठने को देते रहें तो श्वानों और इंसानों में स्वभाविक समन्वय होता ही है। बीमार या सब ठीक होने पर भी यदि कोई श्वान काटता है तो लोग इसकी सूचना तुरंत विभाग को या नगर निगम को फोन करके दे सकते हैं।
बच्चों को स्कूलों में दी जाएगी जानकारी
इस अभियान की विशेष बात है कि स्कूलों में बच्चों को रैबीज के बारे में और इसके बचाव के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही बच्चों को जानवरों के बर्ताव और विशेषकर श्वान, बिल्ली आदि के साथ रहने के बारे में भी बताया जाएगा। अमूमन शहरों में श्वानों द्वारा बच्चों को काटने जैसी समस्या सामने आती हैं। ऐसे में यह जानकारी बच्चों को जीवों को व्यवहार को समझने में भी मदद करेगी।
शहर के पॉश कॉलोनियों के संभ्रांतों के बीच में हुए थे विवाद
उपरोक्त जानकारी शहर के जीव प्रेमियों द्वारा मीडिया से साझा की गई है। उल्लेखनीय है कि शहर के कुछ रहवासी क्षेत्र में जीव प्रेमियों और रहवासियों में श्वानों की संख्या और संरक्षण को लेकर विवाद भी हुए है। और यह विवाद सामान्य रहवासी क्षेत्र से लेकर पॉश कॉलोनियों के संभ्रांत रहवासियों के बीच हुए है। विगत दिनों डॉग बाईट के बढ़ते मामलों की वजह से यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ था।




