मोहन यादव के नाम के साथ भाजपा ने किए सारे सूत्र धराशायी…

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News by – विवेक चौधरी 

रतलाम। भाजपा ने उज्जैन दक्षिण से विधायक मोहन यादव के नाम को मुख्यमंत्री के रूप में आगे कर सारी अटकलों और सूत्रों को धराशायी कर दिया है। यह नाम एक दम चोंकाने वाला था। किसी ने इस नाम की कल्पना नहीं की थी। यद्धपि यही नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा की कार्यशैली रही है। लेकिन मुख्यमंत्री की दौड़ वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, नरेंद्र सिंह तोमर और प्रह्लाद सिंह पटेल के साथ कैलाश विजयवर्गीय और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नाम की अटकलों को इस तरह विराम मिलेगा यह कल्पनातीत था। ये बड़े नाम दौड़ में आगे चल रहें थे लेकिन मोहन यादव का नाम शायद ही किसी ने सोचा होगा। मोहन यादव 2013 से लगातार विधायक बन रहें है और छात्र राजनीति के समय से संघ विचारधारा से जुड़े रहें है। भाजपा ने मोहन यादव का नाम आगे करके यादव वोटों को साधने के साथ काँग्रेस की ओबीसी वाली राजनीति का भी काट प्रस्तुत किया है।

लगभग दो दशक से मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने वाले शिवराज सिंह चौहान के दायित्व बदलने की अटकलें पहले से चल रही थी लेकिन उनकी सनातन के पैरोकार और महिला सशक्तिकरण वाली छवि के साथ बम्पर जीत ने सारे समीकरणों को उलट पलट कर रख दिया था। भाजपा के मुख्यमंत्री के रूप में सर्वाधिक कार्यकाल वाले शिवराज सिंह चौहान की प्रदेश में एक अमिट छाप है। लाडली लक्ष्मियों और लाडली बहनों की वजह से प्रदेश की आधी आबादी महिलाओं में अत्यंत लोकप्रिय नेता है। महाकाल लोक और एकात्म धाम ओम्कारेश्वर जैसी योजनाओं की वजह से सनातन धर्म के बड़े संतो, महात्माओं का भी आशीर्वाद शिवराज सिंह को प्राप्त था। अब केंद्र शिवराज सिंह का नियोजन किस प्रकार करता है, इस पर सबकी निगाहें होगी। पार्टी ने चंबल क्षेत्र दिग्गज नरेंद्र सिंह तोमर को विधान सभा अध्यक्ष बनाने जा रही है। वहीं मालवा के जगदीश देवड़ा और विंध्य क्षेत्र के राजेन्द्र शुक्ल को उप मुख्यमंत्री का दायित्व दिया जा रहा है। राजेन्द्र शुक्ल को बड़ा पद देकर पार्टी ने ब्राह्मणों एवं विंध्य क्षेत्र को साधने के प्रयास किया है। वैसे भी विंध्य क्षेत्र में ब्राह्मणों का अच्छा वर्चस्व है। भाजपा की सारी रणनीति अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर की जा रही है। जो शायद आनेवाले दिनों में स्पष्ट होगी।