पूरे देश में कोरोनावायरस महामारी से हाहाकार मचा हुआ है. लोग ऑक्सीजन और दवाओं के लिए भटक रहे हैं. अस्पतालों में बेड खाली नहीं हैं, राज्य सरकारें केंद्र से लगातार दवा और ऑक्सीजन की मांग कर रहे हैं. इस बीच कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर सरकारी बयानों में विरोधाभास है. कुछ विशेषज्ञ जहां इसे लाइफ सेविंग मेडिसिन बता रहे हैं, वहीं सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि यह दवा कोविड-19 पर कारगर नहीं है.
एम्स निर्देशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने #COVID19 के संक्रमण से बचाव के लिए सभी अनुरुप व्यवहार का पालन करने और रेमडेसिविर (एंटीवायरल) दवा के सही जानकारी और अपने चिकित्सक की सलाह
के साथ उपयोग करने के सुझाव दिए। pic.twitter.com/wxfRdGHt56— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) April 21, 2021
क्या कहते हैं एम्स के निदेशक गुलेरिया
डॉ रणदीप गुलेरिया ने मीडिया से कहा कि रेमडेसिविर कोई जादुई गोली नहीं है और यह कोई ऐसी दवा नहीं है जो मृत्यु दर को कम करती हो. हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि हमारे पास कोई बहुत अच्छी विषाणु रोधी दवा नहीं है. इसकी सीमित भूमिका है और हमें इसका इस्तेमाल अत्यंत सावधानी से करना चाहिए. प्लाज्मा थेरेपी पर भी गुलेरिया ने ऐसी ही टिप्पणी की है.
गुलेरिया ने कहा कि ज्यादातर अध्ययनों में, रेमडेसिविर अस्पतालों में भर्ती केवल उन रोगियों के उपचार में उपयोगी दिखी जिनके शरीर में ऑक्सीजन सांद्रता कम थी तथा एक्स-रे और सीटी-स्कैन के अनुसार जिनकी छाती में वायरस की घुसपैठ दिखी. यदि इसे हल्के लक्षणों की शुरुआत में दिया जाए, या लक्षणमुक्त रोगियों को दिया जाए या फिर इसे बहुत देर से दिया जाए तो यह किसी काम की नहीं है.
मोदी सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के दिये हैं आदेश
केंद्र सरकार के माय गॉव वेबसाइट पर जानकारी दी गयी है कि सरकार ने कंपनियों से रेमडेसिविर का उत्पादन बढ़ाने को कहा है. सरकार ने 6 कंपनियों के 7 अतिरिक्त उत्पादन ईकाइयों को अप्रूवल दिया है. इससे करीब 30 लाख वायल हर महीने बनने लगेगी. सरकार ने दावा किया है कि ऐसा प्रयास किया जा रहा है कि हर महीनें देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन के 70 लाख वायल बन सकें. वहीं सरकार ने इस दवाई के दाम भी घटाए हैं. दवा की दुकानों पर इसकी बिक्री पर बैन लगा दिया गया है. केवल अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर इस्तेमाल की मंजूरी दी गयी है.
रेमडेसिविर की कालाबाजारी से लोग परेशान
एक तरफ बड़े चिकित्सकों का दावा है कि रेमडेसिविर को जादुई गोली नहीं है, जिससे कोरोना का मरीज तुरंत ठीक हो जायेगा. इसे पूरी तरह से प्रमाणित भी नहीं माना जा रहा है. दूसरी ओर चिकित्सक अभी भी इस इंजेक्शन को लिख रहे हैं. मरीजों के परिजनों को कई बार इस इंजेक्शन को ब्लैक में खरीदना पड़ रहा है. कई राज्यों में रेमडेसिविर की कालाबाजारी का मामला भी सामने आया है. साभार – प्रभात खबर





