आज के युग में सबसे ज्यादा ममता मोबाइल व चार्जर की -प्रवर्तकश्री प्रकाशमुनिजी

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News By – नीरज बरमेचा (93028 24420)

रतलाम,14 मार्च। मालव केसरी प्रसिद्ध वक्ता पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य श्रमण संघीय प्रवर्तक पंडित रत्न पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कहा कि ममता बहुत मजबूत होती है। इसे आसानी से छोडा नहीं जा सकता। व्यक्ति की जैसे-जैसे उम्र बढती जाती है, वैसे-वैसे ममता भी बढती है, इसलिए भारतीय संस्कृति में ग्रहस्थाश्रम के बाद वानप्रस्थ की व्यवस्था दी गई है। ममता छोडने वाला व्यक्ति ही त्यागी बन सकता है और दीक्षा ले सकता है।


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प्रवर्तकश्री ने नोलाईपुंरा स्थित श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ममता समय के साथ दूध जैसे गाढी होती है। गाढे दूध में जैसी फिसलन होती है,वैसी ही फिसलन गाढी ममता में होती है। इस फिसलन में व्यक्ति गिरता चला जाता हैं। सच्चा सुख त्याग में है, लेकिन वह ममता को छोडे बिना नहीं मिल सकता है। प्रवर्तकश्री ने कहा कि ममता का मूल मंत्र माता होती है। व्यक्ति जैसे-जैसे बढा होता है, वैसे-वैसे ममता का विस्तार होता है। बचपन में खिलोनों से ममता होती है, लेकिन वर्तमान समय में सबकों मोबाइल और चार्जर से अधिक ममता हो रही है। यह बहुत हानिकारक है। उन्होंने कहा कि त्यागी आत्मा ममत्व वाली नहीं होती, जो ममत्व रखता है, वह त्यागी नहीं हो सकता। ममता कई अलग-अलग रूपों में आती है। इससे धर्म स्थान भी अछूते नहीं रहते। धर्म स्थान में भी व्यक्ति अपने स्थान से ममता रखता है। साधु-संतों को भी ममता हो सकती है, इसलिए इसे छोडना बडा मुश्किल है।

प्रवर्तकश्री ने कहा कि ममता के त्याग के लिए अंदर से भाव होना जरूरी है। त्यागी के लिए पहली शर्त ही ममता छोडना है। ममता का त्याग पुरूषार्थ से होता है और पुरूषार्थ के बिना धर्म नहीं होता। इसलिए हमेशा याद रखे धन यदि पुण्य से मिलता है, तो धर्म पुरूषार्थ से ही प्राप्त होगा। आरंभ में पूज्य श्री दर्शन मुनिजी मसा ने संबोधित किया। पूज्या महासती श्री चेतना जी श्री लाभोदया जी, श्री चंदनबाला जी, श्री रमणीक कुँवर जी, श्री कल्पना जी, श्री चंदना श्री जी, श्री महिमा श्री जी ने स्तवन प्रस्तुत किया। इस मौके पर तपस्वियों ने अलग-अलग तप के प्रत्याख्यान लिए। बाहर से आए अतिथियों के आतिथ्य सत्कार का लाभ पूनमचंद मूणत परिवार ने लिया। धर्मसभा का संचालन राजमल चैपडा ने किया।


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