डॉ अरुण पुरोहित मित्र मंडल एवं सर्व ब्राहम्ण महासभा द्वारा 75 वां नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर व योग-ध्यान शिविर..

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News By – नीरज बरमेचा 

डॉ अरुण पुरोहित मित्र मंडल एवं सर्व ब्राहम्ण महासभा द्वारा 29 मई को 75 वां निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित हो रहा है। इसके अलावा 5 से 12 जून तक निशुल्क योग प्राणायाम एवं ध्यान शिविर भी आयोजित होगा। स्वास्थ्य परीक्षण शिविर 29 मई को सुबह 10 से 12 बजे न्यू रोड स्थित ई.एन.टी. डायग्नोस्टिक

सेंटर पर होगा। इसी तरह विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून से 12 जून तक सुबह 6 से 7:30 बजे योग शिविर एवं शाम 7:30 से रात्रि 8:15 बजे तक ध्यान शिविर राजेंद्र नगर स्थित

सुभेदार आई.एम.ए. हॉल में आयोजित किया गया है। 75 वें स्वास्थ्य शिविर के दौरान जरूरतमंदों को नि:शुल्क दवाईयों का वितरण एवं ऑडियोलॉजिस्ट प्रणव पुरोहित द्वारा निशुल्क श्रवण परीक्षण किया जावेगा। आवश्यकता अनुसार श्रवण यंत्र का परीक्षण भी होगा। शिविर में नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ अरुण पुरोहित, डॉ. प्रज्ञा पुरोहित एवं ऑडियोलॉजिस्ट प्रणव पुरोहित निशुल्क सेवाएं देंगे। शिविर हेतु निर्धारित समय 10 से 12 बजे से पूर्व

सुबह 9 बजे से पंजीयन किया जाएगा। इसी प्रकार 5 से 12 जून तक होने वाले योग एवं ध्यान शिविर के लिए पंजीयन का कार्य 28 मई से न्यू रोड स्थित ई. एन.टी. डायग्नोस्टिक सेंटर पर 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगा। शिविर में डॉ गणेश राव ऋषिकेश के मार्गदर्शन में योगा इंस्टीट्यूट मुंबई से प्रशिक्षित डॉ प्रज्ञा पुरोहित अपनी निशुल्क योग प्रशिक्षण देंगी।

सायं 7.30 से 8.30 बजे आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान योग से रोग निवारण नोट- शिविर में एक बाक्स रखा जाएगा। बाक्स में शिविरार्थी अपनी पीड़ा लिखकर पर्ची रखेंगे। पीडा का निवारण दूसरे दिन बिना नाम लिए बताया जाएगा। शिविर में वजन कैसे कम किया जाए और आहार-विहार की जानकारी भी दी जाएगी।

“प्रज्ञावान”प्रज्ञा

आधुनिकता के इस दौर में WHO ने स्वास्थ्य की परिभाषा को अपग्रेड करते हुए शरीर, मन, समाज के बाद आध्यातमिक रूप से सेंस नॉ वेल बीइंग इंसान को ही स्वस्थ माना है पहला सुख निरोगी काया मन चंगा तो कठौती में गंगा ये कहावते आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं श्रीकृष्ण के अहं ब्रह्मास्मि आदि शंकराचार्य के आदि अनंता को समझने और समझाने रामकृष्ण, विवेकानंद, रमन महर्षि, निसर्गदत, नीम करोली, मां आनंद माई, शेगांव, ओशो इत्यादि देश में बहुत से लोग जाग्रत हुए है व्यक्तिगत चेतना और ब्रह्मांडीय चेतना को समझा और हमें उसके बारे में बताया उन्ही महान आत्माओं कि प्रेरणा लेकर प्रजा जी हमारे शहर में मौजूद है पेशे से दन्त विशेषज्ञ है। प्रज्ञा जी का जन्म Dr. BD पुरोहित के घर पोत्री के रूप में हुआ उन्हीं के आदर्शों का पालन करते हुए बचपन से ही योग और आध्यत्म में रुचि रही और उसी में excell करती रही पतंजलि के आठ अंगो के प्रथम 5 अंग तो काफी लोग पूर्ण कर लेते हैं। प्रज्ञा जैसे बिरले ही होते हैं जो अंतिम तीन चरणों को भी पार पा लेते हैं वरना साधारण मनुष्यों को तो जन्म लग जाते हैं प्रज्ञा जी की ज्ञान गंगा में प्रवाहित हो कर उसमें डुबकी लगाने का सौभाग्य रतलाम की जनता को भी मिलने वाला है।

5 जून से 12 जून तक वो हमें आठो अंगो को दो स्वरूप में सिखाएंगी और समझाएंगी औ । प्रातः काल शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य के लिए हठ योग के जरिये हमारा मार्गदर्शन करेंगी और सांय काल में जो प्रबुद्धजन ध्यान, समाधि के बारे में विस्तार से जानना और उसमे कैसे जाना ये सब जानना चाहेंगे तो उनका मार्ग दर्शन करेंगी उनका उद्देश्य है कि जो भी मुमुक्षु हैं जो आत्मा और परमात्मा का मिलन केसे हो उसकि तड़फ हो और रास्ता न सूझ रहा हो उनके लिए कैम्प और उसके बाद भी निशुल्क राह दिखाना है। उनका कहना है ये प्रकृति प्रदत्त है मुझे इसे बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़ना है। हम साधारण मनुष्य संसार की परेशानियों में उलझ कर रह जाते है और अपनी स्वयं की मौलिकता का आभास तक खो बैठते है। उनका मानना है कि इस संसार में रहते हुए के ना कैसे होकर रह सकते हैं। गृहशय आश्रम का निर्वाह करते हुए अपने काम काज को भी पूर्ण रूप से करते हुए कैसे चेतना के स्वरूप को समझना जानना और विलीन होना ही मनुष्य का एक मात्र उद्देश्य हो ।

आजकल अध्यात्म शब्द का प्रयोग सोशल मीडिया पर जोरों से है फिल्मों में, मैगजीन्स में, क्लब इतियादी में ये शब्द बहुत ही प्रचलित है पर वास्तविकता में अधिकतर लोगों केलिए एक status symbol ही है। प्रज्ञा जी इतने सरल और खूबसूरती से इस शब्द की व्याख्या करते हुए बताती है कि spirituality याने की अध्यमिकता कैसे हमें आत्मोउतथान और अपने स्वयं की और उन्मुख होना सिखाती है और अंततः हम जान पाते है कि हम कौन है हमारा इस संसार में आने का क्या प्रयोजन है हमें इस संसार में बिना किसी मानसिक संताप के परमानंद के साथ कैसे पल दर पल जीना चाहिये बिना किसी मोह के परंतु असीम प्यार के क्रोध लोभ मोह अहंकार आदि विकारों से कैसे आसानी से छुटकारा मिल जाये और जीवन की राह आसान हो आप किसी भी धर्म या संप्रदाय का पालन करते हो आपको वो ही करते ही रहना है फिर चाहे आप सनातनी हिंदू हो, जैन हो बुद्ध हो सिख हो या मुस्लिम हो यहां तक की आप आस्तिक हो या नास्तिक आप जो भी मान्यता के मानने वाले हो उसमे इतनी प्रगाइता और समझ आ जाती है की हम स्वयं भी आश्चर्य चकित रह जाते हैं इनके अनुसार इसमें कोई भी गुरु शिष्य नहीं है हम सब एक राह के राहगीर है कुछ की आंखे खुली है कुछ की बंद।


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