News By – विवेक चौधरी
रतलाम, बुधवार 16 नवंबर 2022। रतलाम जिले के ग्राम धराड़ में मंगलवार को भाजपा सांसद गुमान सिंह डामोर और रतलाम ग्रामीण के भाजपा विधायक दिलीप मकवाना के काफिले को अचानक से रोककर घेराव करने और पथराव करने के मामले में जयस के आरोपित नेताओं को जेल भेज दिया गया है। इस मामले में बिलपांक थाना पुलिस ने मंगलवार की रात को जयस संगठन से संबंधित पांच नेताओं को गिरफ्तार किया था और इन्हें कड़ी सुरक्षा में बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया। गिरफ्तार किए गए डॉ. आनंद राय, डॉ. अभय ओहरी, विलेश खराड़ी, अनिल निनामा और गोपाल वाघेला को पुलिस ने कोर्ट में एससीएसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश डीएस चौहान के सामने पेश किया जहाँ से इन्हें जेल भेज दिया गया। इस प्रकरण पर कल सुनवाई होगी। गिरफ्तार नेताओ में से डॉ आनंद राय व्यापम घोटाले के व्हीसील ब्लोअर के रूप में जाने जाते है। इनके पूर्व जयस नेताओं की गिरफ्तारी का आदिवासी संगठनों के संभावित विरोध को देखते हुए रतलाम शहर में कोर्ट परिसर को पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दया था। कोर्ट चौराहे पर छत्रीपुल, कॉन्वेंट स्कूल समीप नगर निगम के मंच के पीछे और पुराने कलेक्टोरेट से बेरिकेटिंग कर पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी। सिर्फ जिन्हें कोर्ट क्षेत्र में आवश्यक कार्य था उन्हें ही जाने दिया जा रहा था।

क्या था घटनाक्रम…
रतलाम प्रशासन की ओर से मंगलवार को ग्राम धराड़ के पास स्थित ग्राम बढ़छपरा में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम आयोजित गया था। रतलाम झाबुआ सांसद गुमान सिंह डामोर, रतलाम ग्रामीण विधायक दिलीप मकवाना सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारीगण कार्यक्रम में सम्मिलित होने आए थे। कार्यक्रम पश्चात जब सांसद और विधायक अपने काफिले के साथ वापस लौट रहे थे, तब ग्राम धराड़ के समीप जयस समर्थकों की भीड़ ने काफिले को रोक लिया और नारेबाजी करने लगे। भीड़ ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और रतलाम के समीप घोषित निवेश क्षेत्र का विरोध करने लगे। अचानक उपजे इस घटनाक्रम में सुरक्षाकर्मियों को सांसद विधायक के काफिले को भारी मशक्कत के साथ निकालने की जद्दोजहद करनी पड़ी। गाड़ी से बाहर निकलकर सांसद डामोर द्वारा प्रदर्शनकारियों से बात करके स्थिति संभालने का प्रयास भी व्यर्थ चला गया। बताया जा रहा है कि घटनाक्रम में पत्थर भी चले है और स्थिति सँभालने के चक्कर में हुई धक्कामुक्की में कलेक्टर के गनमैन भी घायल हो गया था। स्थिति को बिगड़ता देख रतलाम कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मोर्चा सम्भाला। पहले समझाइश देकर और बाद में सख्ती दिखाकर अराजक प्रदर्शनकारियों को काबू में किया तथा काफिले को सुरक्षित बाहर निकाला। इस मामले में पुलिस ने बिलपांक थाने पर मामला दर्ज किया। घटना के वीडियो वायरल हुए थे तथा प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर लोगो को चिन्हित करके कार्यवाही की जा रही थी।

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