जब कथावाचक पण्डित जी ने क्रोधित होकर समय से पहले ही कथा समाप्त कर दी, जानिए क्या है मामला…

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News by – विवेक चौधरी

रतलाम (सोमवार)। सामान्यतया कथावाचक श्रद्धालुओं श्रोताओं को जीवन मे शांत और संयमित रहने की सलाह सुझाव देते है। लेकिन कभी कभी ऐसी परिस्थितियाँ भी निर्मित हो जाती है जब कथावाचक अपनी सलाह के विपरीत स्वयं क्रोधित हो जाते है। यहाँ इस बात पर अपनी कोई राय बनाने के पहले इस घटना की परिस्थितियों को समझना भी आवश्यक है। मामला कुछ इस तरह का है कि इन दिनों देश प्रदेश में अपनी शिवपुराण कथा एवं उपायों की वजह से लोकप्रिय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा सीहोर वाले की रतलाम में शिवपुराण कथा चल रही है। क्षेत्र एवं आसपास से भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति कथा श्रवण के लिए हो रही है। कथा का प्रसारण आस्था चेनल पर भी किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पण्डित जी की लोकप्रियता और भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद भी कथा का साउंड सिस्टम ठीक नहीं है। रविवार को कथा के दूसरे ही दिन पण्डित जी ने चेतावनी दी थी कि यदि साउंड सिस्टम दुरुस्त ना हुआ तो वे कथा बीच मे छोड़ देंगे। और सोमवार को कथा के तीसरे दिन यह हो भी गया।

कथा का समय सामान्यतया दोपहर एक बजे आए 4 बजे का है लेकिन पण्डित मिश्रा जी समय से एक घण्टे पहले ही कथा समाप्त कर उठ गए। वे सचेत किये जाने के बावजूद भी साउंड सिस्टम सुधारे ना जाने से नाराज़ दिखे। उन्होंने आगामी कथाओं के आयोजकों को भी मंच से सचेत कर दिया कि सुन लो गुजरात वालों, महाराष्ट्र वालों कथा के दौरान माइक सही रखना। रतलाम वालों की तरह मत करना। पंडित जी ने रतलाम के आयोजकों पर रुपये बचाने के लिए साउंड सिस्टम की गुणवत्ता पर समझौता करने पर नाराजगी व्यक्त की। स्वाभाविक है कि इस स्तर के कथा कार्यक्रम इत्यादि में उच्च गुणवत्ता के साउंड सिस्टम का होना अत्यंत आवश्यक होता है। विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कथा का श्रवण लाखो लोग करते है। ऐसे में व्यवस्था बिगड़ने से सभी को परेशानी होती है। बहरहाल अब यह देखना होगा कि कथा के चौथे दिन मंगलवार को साउंड सिस्टम कैसा रहता है। इस सात दिवसीय कथा का समापन 29 अप्रैल को होगा।

कथा क्षेत्र के दुकान संचालकों में भी रोष…

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए व्यवसाय के दृष्टि से लगने वाली दुकानों के संचालक भी आयोजको से नाराज दिखे थे।बताया जा रहा है कि कथा स्थल पर दुकानदारों से आयोजकों अथवा स्थान आवंटनकर्ताओं ने  जो राशि ली थी, उसको लेकर दुकानदारों में कुछ असंतोष हुआ था। जिसके चलते दीनदयाल नगर थाना प्रभारी ने मामले को शांत कराने के प्रयास किये थे। दुकानदारों के असंतोष का मुख्य कारण भारी भीड़ के बावजूद व्यवसाय का ना होना बताया जा रहा है। गर्मी बहुत है। कथा का समय दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक का है। श्रद्धालुगण कथा सुनने आते हैं और भीषण गर्मी की वजह से तुरंत लौट जाते हैं। साथ ही कई सेवाभावी लोगों ने निशुल्क अथवा कम मूल्य पर स्टाल लगाए हैं जिसकी वजह से दुकानदार व्यवसायियों को नुकसान देखना पड़ रहा है। दुकानदारों को लगा था कि पंडित जी की कथा में भारी भीड़ उमड़ेगी जिससे उनका व्यवसाय बढ़िया चलेगा। भीड़ तो आ रही है लेकिन अभी तक व्यवसाय अपेक्षाकृत कमजोर है।


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1 टिप्पणी

  1. Pandit Ji ne koi aam logon ki tarah gussa nahin kiya hai unhone Katha ko Shanti se viram diya hai aur sari public se unhone kshma bhi mangi hai

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