News By – विवेक चौधरी
रतलाम। रतलाम विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद पर भाजपा के युवा नेता तथा पूर्व नगर निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल के नाम की घोषणा के साथ ही नगर की राजनीति में हलचल शुरू हो गई है। पिछले दिनों हुए नगर निकाय चुनाव में अशोक पोरवाल भाजपा महापौर प्रत्याशी के रूप में प्रबल दावेदार थे लेकिन अंतिम समय पर विधायक खेमे की ओर से प्रह्लाद पटेल का नाम तय होने से अशोक पोरवाल नाराज चल रहे थे। यह भी देखा गया कि नगर निकाय चुनाव के समय से उन्होंने नगर विधायक चैतन्य काश्यप से दूरी बढ़ा ली थी। उल्लेखनीय है कि न्यूज़ इंडिया 365 द्वारा अपने पाठकों के बीच कराए गए सर्वे में भी अशोक पोरवाल भाजपा महापौर प्रत्याशी के रूप में अव्वल नंबर पर थे किंतु अंतिम समय में बने समीकरणों की वजह से अशोक पोरवाल को महापौर प्रत्याशी के टिकिट से वंचित कर दिया गया था। युवा अशोक पोरवाल इस घटना के बाद से ही स्थानीय विधायक खेमे से नाराज चल रहे थे। विगत दिनों भाजपा संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों के रतलाम प्रवास के बाद अशोक पोरवाल का नाम भाजपा जिला अध्यक्ष के रूप में भी उभरा था लेकिन विधानसभा के चुनाव के पूर्व एवं विगत एक दशक से खाली पड़े रतलाम विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद के रूप में अशोक पोरवाल का नाम सामने आने से शहर की राजनीति में हलचल शुरू हो गई है। जो विधानसभा चुनाव के पूर्व होने से अब रोचक भी हो गई है।
नगर सरकार की पिछली पारी में अशोक पोरवाल भाजपा की ओर से निगम अध्यक्ष के पद पर आसीन थे। और अशोक पोरवाल की युवाओं में भी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनपर भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय की छत्रछाया भी है। अपने विद्यार्थी काल से पोरवाल युवा राजनीति से जुड़े रहें है। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार नगर निगम चुनाव के समय से विभिन्न कारणों से जो भाजपा कार्यकर्तागण नगर विधायक से नाराज़ चल रहे हैं, वो अशोक पोरवाल के साथ लामबंद हो रहे थे। अशोक पोरवाल के समर्थकों का यह मानना था कि उनका महापौर प्रत्याशी के रूप में इसलिए टिकट काटा गया था कि वह आने वाले समय में नगर विधायक के प्रबल दावेदार बन सकते थे। यदि वे महापौर का चुनाव लड़ते तो निश्चित ही बड़े अंतर से चुनाव जीतते और नगर के विकास के साथ-साथ भविष्य में भाजपा का बड़ा चेहरा बन सकते थे इसीलिए अंदरूनी राजनीति ने अशोक पोरवाल को महापौर नहीं बनने दिया। भाजपा के प्रदेश राजनीति के जानकारों की माने तो अशोक पोरवाल के सरपरस्त कैलाश विजयवर्गीय प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं और जिसकी वजह से उन्हें रतलाम महापौर के टिकट से वंचित होना पड़ा था। बताया तो यह भी जा रहा है कि अशोक पोरवाल अपने समय का इंतजार कर रहे थे और अब वो आने वाले समय में वह भाजपा की नगर राजनीति के समीकरणों में बदलाव ला सकते हैं। देखना यह होगा कि विधायक खेमा इस नियुक्ति को किस प्रकार देखता है तथा रतलाम भाजपा की अंदरूनी राजनीति में सत्ता के विकेंद्रीकरण को किस प्रकार साधता है। विगत दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा जावरा विद्यायक डॉ राजेन्द्र पाण्डेय को भी तवज्जों दी जा रही है। जिसने जिले की राजनीति पर नज़र रखने वालों की दिलचस्पी बड़ा दी है। कहते है कि समय बलवान होता है लेकिन देखना यह होगा कि समय के साथ जिले और शहर की राजनीति में कौन अधिक बलवान होगा? साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या यह नियुक्ति अशोक पोरवाल अथवा विजयवर्गीय गट को संतुष्ट करने के लिए की गई है या अशोक पोरवाल की नियुक्ति के माध्यम से किसी अन्य के पर कतरे जा रहें है? नज़र रखिये और न्यूज़ इंडिया 365 पढ़ते रहिए…
रतलाम विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष युवा भाजपा नेता अशोक पोरवाल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया


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