News by – विवेक चौधरी
रतलाम। अक्सर विकास के नए कार्यों से होने वाली परेशानियों के बारे में शिकायत की जाए तो जिम्मेदार कहते नज़र आते है कि यह तो “प्रगति की प्रसव पीड़ा” है। आने वाले समय में आपको इन कार्यों की वजह से आसानी रहेगी। निःसंदेह विकास कार्य पूर्ण हो जाने पर जीवन सरल और सुगम तो हो जाता है लेकिन कार्य प्रगतिशील रहने तक परेशानियों का सबब बना रहता है। रतलाम को जावरा की ओर फोरलेन से जोड़ने वाली जावरा रोड के सिटी फोरलेन के कार्य की बात करें तो लंबे समय से घोषणाओं के बाद इसका कार्य प्रारंभ तो हो गया लेकिन समय काल और परिस्थितियों ने इस प्रगति से प्रजा के लिए परेशानियां ही खड़ी की है। अच्छी बारिश से इस निर्माणाधीन मार्ग पर कीचड़ और गड्डों का साम्राज्य है।
अदूरदर्शिता के साथ प्रगति कार्य
जब सेजावता फंटे से रतलाम के लिए जावरा रोड पर जाएंगे तो आप पाएंगे कि रोड के चौड़ीकरण का कार्य “प्रगतिशील” है लेकिन इन दिनों औद्योगिक क्षेत्र के इलाके में पेड़ काटते और ट्रक में लोड करते हुए मजदूर दिख सकते है लेकिन दूसरा कोई कार्य होता शायद ही कुछ दिखेगा। फोरलेन फंटे से डोसीगांव नाले तक सड़क चौड़ी करने के लिए दोनों तरफ पेड़ काट दिए गए है। आधी से ज्यादा सड़क खोद दी गई है, माल भराव का शुरुआती कार्य हुआ है लेकिन राहगीरों को कीचड़ से आते जाते गिरते पड़ते संघर्ष करते देखा जा सकता है। औद्योगिक क्षेत्र तरफ आने जाने वालों को असुविधा ना हो इसके लिए कोई पूर्व योजना नहीं दिखती है। जबकि दोपहिया और छोटी गाड़ियों के लायक मार्ग बनाकर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा सकता था। लेकिन जब निर्माण कार्य लोकतंत्र की महत्वपूर्ण इकाई आम जनता पर अहसान के भाव से हो तो आशा अपेक्षा बेमानी हो जाती है। क्या करें, आखिर “प्रगति की प्रसव पीड़ा” तो झेलनी ही पड़ती है।
परेशानी का सबब वैकल्पिक मार्ग
यदि आप अभी रतलाम शहर से जावरा के लिए जावरा रोड से सफर करेंगे तो पता चलेगा कि जो लोग यहाँ से नियमित यात्रा करने को बाध्य है, उनका क्या हाल होता होगा। सेजावता फंटे से रतलाम शहर में प्रवेश करने के लिए जावरा रोड के अतिरिक्त फोरलेन बायपास से खाचरोद रोड, कलेक्टोरेट अथवा सेजवाता बंजली बायपास, मेडिकल कॉलेज से सैलाना रोड होते हुए नगर प्रवेश करने का विकल्प है। यदि दो बत्ती क्षेत्र या स्टेशन जाना हो तो जावरा रोड की तुलना में लगभग लगभग दुगना समय और डेढ़ गुना दूरी तय करना पड़ती है। वहीं औद्योगिक क्षेत्र से रेलवे अस्पताल जाने वाले मार्ग की हालत भी खराब है। कुल मिलाकर ‘बीरबल की खिचड़ी जैसी प्रगति वाले’ इस कार्य के पूर्ण होने तक इस राह के राहगीर तो अपने प्रारब्ध ही काट लेवें।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते है यहाँ
कलम चलाकर फरमान देने वाले बड़े अधिकारी हो या वर्दी वाले साहब लोग, ये तो अपने वाहन को फोरलेन या बंजली बायपास से ले जाते है लेकिन एस.एस.आई.टी. कॉलेज, सृजन कॉलेज, मॉर्निंग स्टार स्कूल, औद्योगिक क्षेत्र की छोटी बड़ी इकाइयों, कार के तीन शोरूम इस क्षेत्र में स्थित है। यहाँ आने वाले इसी मार्ग का उपयोग करने के लिए बाध्य है। अनेकों को इसी मार्ग का उपयोग करके रेलवे स्टेशन और जावरा फाटक बस स्टैंड तक जाना पड़ता है। जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों को इस मार्ग का उपयोग करना पड़ता है जो परेशानियों को बेबस होकर झेल रहें है। जिस तेजी से इस मार्ग पर पेड़ काटे गए है यदि इसी तेज़ी से सड़क निर्माण कार्य भी होता तो जनता के लिए राहत रहती।
प्रगति या कार्य पूर्ण होने तक की पीड़ा
जब तक कार्य पूरा नहीं होता तब तक परेशानी तो होती है, लेकिन अदूरदर्शिता और मनमाने तरीके से कार्य होने से पीड़ा अधिक होती है। शास्त्री नगर फोरलेन बेहतरीन बना हुआ लगता है लेकिन तेज़ बारिश के बाद कि स्थिति सबके सामने होती है। फ्रीगंज रोड पर खुदाई की हुई सड़क तो दुर्घटना को आमंत्रण दे रही है। कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति सुभाष नगर अथवा सागोद रोड वाली नई रेलवे पुलिया के कार्य पूर्ण होने की तय तारीख नहीं बता सकता है लेकिन यदि समय पर कार्य पूरा ना हो तो कारण गिना ही सकता है। बेरहमी से कटते पेड़, मरते पक्षी के साथ परेशान प्रजा सबने देखी है। लेकिन घटनाओं से सीख और सुधार की प्रवृत्ति का अभी भी अभाव है। यद्धपि विगत दिनों शहर की दिशा और दशा बदली है, जिसका श्रेय जिम्मेदारों को दिया जाना चाहिए लेकिन बदलाव की “प्रसव पीड़ा” प्रजा को जनता ने भोगा है और भोग रही है, इसे भी भूलना नहीं चाहिए।



