चुनावी समर में अफवाहों का भी सहारा, ग्रामीण में निर्दलीय ने बढ़ाई मुश्किल…

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News by – विवेक चौधरी

रतलाम। पूरे प्रदेश के साथ साथ रतलाम में भी “चुनावी फ़ीवर” में थर्मामीटर का पारा चढ़ रहा है। चुनावी क्षत्रप चुनावी युद्ध के मैदान में “अफवाहों” का उपयोग करने का भी मौका नहीं छोड़ रहें है। मामला जब त्रिकोणीय हो तो अफवाह का सहारा लेकर मतदाताओं को भ्रमित करने के प्रयास भी एक चुनावी दाँव बन जाता है। मामला रतलाम ग्रामीण विधानसभा का है जहाँ काँग्रेस से दावेदार और लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्र में आदिवासियों के बीच सक्रिय डॉ अभय ओहरी के चुनाव मैदान में उतरने से हुई हलचल का है। जिनके समर्थकों ने उनका वीडियो जारी करके यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि डॉ ओहरी ने मैदान नहीं छोड़ा है और उन्होंने काँग्रेस को समर्थन नहीं दिया है। वो पूरे दमखम के साथ मैदान में डटे हुए है। वीडियो में डॉ ओहरी ने यह भी कहा है कि जिसने भी यह कारस्तानी की है वो माफी योग्य नहीं है। वे इसकी शिकायत चुनाव आयोग से करेंगे। ये सब चुनावी सपने देखने वाले मुंगेरीलाल किस्म के लोगों की हरकत है।

समीकरण क्या कह रहे है रतलाम ग्रामीण के…

उल्लेखनीय है कि मौजूदा भाजपा विधायक दिलीप मकवाना को लेकर भाजपा के एक वर्ग में नाराजगी थी, जिसकी वजह से भाजपा ने पूर्व विधायक मथुरालाल डामर को अपना उम्मीदवार बनाया और भाजपा ने मौके पर चौका लगा दिया था। वहीं काँग्रेस ने जनपद में अपनी सेवाएँ दे चुके लक्ष्मण डिंडोर को उम्मीदवार बनाया। घोषणा के पूर्व ही स्थानीय काँग्रेस नेताओं ने बाहरी उम्मीदवार का विरोध शुरू कर दिया था। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय एवं आदिवासियों में पकड़ रखने वाले डॉ अभय ओहरी भी काँग्रेस से प्रबल दावेदार थे। जब उन्हें काँग्रेस ने मौका नहीं दिया तो वे जयस की ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर गए।

डॉ ओहरी से काँग्रेस के समीकरण बिगड़े

डॉ अभय ओहरी के चुनावी समर में उतरने से रतलाम ग्रामीण सीट पर काँग्रेस के समीकरण बिगड़ गए है। डॉ ओहरी की आदिवासियों में अच्छी पकड़ है और क्षेत्र में लंबे से सक्रिय भी है। उनकी दावेदारी भी मजबूत थी लेकिन लक्ष्मण डिंडोर और पूर्व विधायक मथुरालाल डामर की प्रतिद्वंद्विता भी पुरानी थी जिसकी वजह से डिंडोर भी पूरा जोर लगा रहें थे। काँग्रेस ने टिकिट डिंडोर को दिया तो डॉ ओहरी बागी के रूप में मैदान में आ गए। उनके समर्थन में जावरा से काँग्रेस के बागी उम्मीदवार और राजपूत समाज में पकड़ रखने वाले जीवन सिंह शेरपुर भी आ गए। अब रतलाम ग्रामीण में मामला त्रिकोणीय हो गया है। डॉ ओहरी को समर्थकों को साधने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एवं काँग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह जब रतलाम आए तो वे अपने साथ डॉ आनंद राय को भी लेकर आए थे जिनकी आदिवासियों की पार्टी जयस की स्थापना में भूमिका रही है। इससे उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र को भी साधने की कोशिश की है। लेकिन यह दाँव कितना चलता है यह तो वक्त ही बताएगा।

क्या परिवर्तन की हवा चलेगी या त्रिकोणीय द्वंद का लाभ मिलेगा?

प्रदेश में भाजपा के विरोध में काँग्रेस का दावा परिवर्तन की लहर का है। रतलाम ग्रामीण में मौजूदा भाजपा विधायक का टिकिट काटकर पूर्व विधायक को टिकिट देकर भाजपा ने परिवर्तन की हवा के रुख को मोड़ने की कोशिश की है। इससे उन्हें नाराज कार्यकर्ताओं को भी साधने के मौका मिला। वहीं डॉ अभय ओहरी के मैदान में डटने से प्राथमिक समस्या काँग्रेस खेमे के लिए नज़र आ रही है। इसका लाभ अपने समर्थकों में “बा” के नाम से लोकप्रिय मथुरालाल डामर को कितना मिलता है यह तो वक्त ही बताएगा। जनपद में सेवा देते समय लक्ष्मण डिंडोर ने भी ग्रामीणों में अपनी पकड़ बनाना शुरू कर दी थी जिसका उन्हें लाभ तो मिलेगा लेकिन डॉ ओहरी ने वीडियो जारी करके पुनः इस बात का संदेश दिया है कि उन्होंने मैदान ना छोड़ा है ना छोड़ेंगे। यह काँग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं है। बहरहाल रतलाम ग्रामीण सीट पर “बा, साहब और डॉ साहब” के बीच का त्रिकोणीय मुकाबला रौचक नज़र आ रहा है