पाकिस्तान मेरी लाश पर गुजरकर बनेगा, शायद सबसे पहला राजनैतिक जुमला? जानिए किसने मालवा मीडिया फेस्ट में यह बात कही…

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हे राम पुस्तक पर प्रखर श्रीवास्तव से चर्चा

News By – विवेक चौधरी 

रतलाम, रविवार 28 जनवरी। “विभाजन के समय महात्मा गांधी चुप क्यों थे? वह कहते थे कि पाकिस्तान मेरे शरीर के ऊपर से चलकर ही बनेगा। लेकिन वह तब भी वह चुप थे जब पाकिस्तान के निर्माण का प्रस्ताव आया”। अपने संवाद में यह बात विख्यात लेखक प्रखर श्रीवास्तव ने कही। अनेक राष्ट्रीय टीवी चैनल्स के साथ जुड़े रहे प्रखर श्रीवास्तव रविवार को रतलाम में मालवा मीडिया फेस्ट के समापन सत्र में बोल रहे थे। अपनी पुस्तक हे राम और महात्मा गाँधी पर बोलते हुए प्रखर ने महात्मा गाँधी की हत्या के समय के अंतिम तीन शब्द ‘हे राम’ पर कहा कि, “मुझे लगता है ये कोई बड़ी बात नहीं है। अगर हमें चोट लगती है, तो भी हम ‘हे राम’ कहते हैं”। उन्होंने यह भी कहा कि शायद तुष्टीकरण, विभाजन रोकने में विफल रहने और हिंदू सिख शरणार्थियों की दुर्दशा गाँधी की हत्या के कारण हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि प्रखर श्रीवास्तव ने महात्मा गाँधी की हत्या एवं उनके कारण तथा जीवन पर अत्यंत चर्चित पुस्तक “हे राम” लिखी है। जिसमें महात्मा गाँधी के जीवन के अनछुए पहलुओं पर तथ्यात्मक जिक्र किया हैं। जिसके लिए उन्होंने लंबे समय तक श्रमपूर्वक शोध किया है। इस विषय पर सोशल मीडिया में उन्हें काफी देखा सुना जाता है।

“न्यू इंडिया – न्यू मीडिया” के वक्ता एवं अतिथि

बेबाकी और दृढ़ता के साथ बोले प्रखर

अपनी बात को बड़ी बेबाकी और दृढ़ता से रखते हुए प्रखर ने कहा कि गाँधी जी कहते रहे कि पाकिस्तान मेरे शरीर पर गुज़रकर ही बनेगा, लेकिन जब विभाजन का समय आया, तब वे चुप रहे। यहाँ तक कि जब पाक के लिए प्रस्ताव पारित किया गया, तब भी पाकिस्तान के गठन को गाँधी जी ने चुपचाप मंजूरी दे दी। इसलिए उन्हें लगता है कि शायद यह पहला राजनीतिक जुमला था कि “पाकिस्तान मेरी लाश के ऊपर से बनेगा।” और शायद गाँधी कभी नहीं चाहते थे कि पाकिस्तान का निर्माण रोका जाए।

उन्होंने तथ्य प्रस्तुत करते हुए आगे कहा कि, गाँधी जी को उनके अनशन के लिए जाना जाता है, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के निर्माण रोकने के लिए अनशन क्यों नहीं किया? जबकि वे कहते थे कि पाक मेरे शरीर पर गुजरने के बाद ही बनेगा। उन्होंने विभाजन के पहले और विभाजन के बाद अनशन किए लेकिन विभाजन रोकने के लिए नहीं। मौलाना आज़ाद एवं अन्य तत्कालीन शख्शियतों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन एक विफल प्रयास था।

आलोक श्रीवास्तव से चर्चा करते हुए रुचि श्रीमाली

इतिहास बदलने की नहीं, सुधारने की कोशिश

संवाद सत्र में उन्होंने दर्शकों के सवालों का भी जवाब भी बेबाकी और तथ्यों के साथ दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या इतिहास को बदलने की कोशिश की जा रही है तो उन्होंने कहा, ”इतिहास को बदलने की कोशिश नहीं की जा रही है बल्कि इतिहास को सुधारने की कोशिश की जा रही है।” गोदी मीडिया के प्रश्न पर उन्होंने पुराने दिग्गज पत्रकारों की घटनाओं के माध्यम से कहा कि कंबल ओढ़कर घी पीने वालों से तो अच्छे बेबाक पत्रकार है, जिनकी विचारधारा में कोई मुखोटा नहीं है। उन्होंने गाँधी हत्या के पश्चात महाराष्ट्र में चितपावन ब्राह्मणों के खिलाफ़ हुए दंगो का जिक्र किया। और कहा कि अहिंसावादी नेता के तथाकथित समर्थको की भीड़ द्वारा नारायण सावरकर के हत्या का प्रयास, शायद आज़ाद भारत की पहली मोब लिंचिंग की घटना थी। प्रखर श्रीवास्तव शनिवार और रविवार को सक्षम संचार फाउंडेशन की ओर से रतलाम में आयोजित दो दिवसीय मालवा मीडिया फेस्ट के समापन सत्र में बोल रहे थे। उनके साथ हिरेन जोशी ने संवाद किया।

न्यू इंडिया – न्यू मीडिया पर हुई चर्चा

रतलाम मूल की प्रसिद्ध मीडिया शख्शियत अर्चना शर्मा के नेतृत्व में आयोजित मालवा मीडिया फेस्ट का उद्घाटन शनिवार को आईआईएमसी के पूर्व डीजी संजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर द्विवेदी ने कहा, “भारत का विचार एक वैश्विक विचार है। भारत की संस्कृति ऐसी है जो विश्व के कल्याण की कामना करती है। इसलिए भारत का विचार वैश्विक स्तर पर भी स्वीकार्य है।” प्रसिद्ध यूट्यूबर रुचि श्रीमाली और वरिष्ठ पत्रकार लेखक हिरेन जोशी ने विभिन्न संवाद सत्रों का संचालन किया। वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र जाखेटिया ने भी चर्चा में भाग लिया। जबकि मंच संचालन का जिम्मा आशीष दशोत्तर ने संभाला।

हे राम पुस्तक का कवर पेज

“न्यू इंडिया-न्यू मीडिया” विषय पर चर्चा करते हुए प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि डिजिटल मीडिया के उदय ने भारत की छवि निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई है। डिजिटल मीडिया की वैश्विक पहुंच के कारण भारत की ज्ञान परंपरा वैश्विक स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर एक दिन में 320 करोड़ से ज्यादा तस्वीरें शेयर की जा रही हैं और 800 करोड़ से ज्यादा वीडियो देखे जा रहे हैं। एक व्यक्ति प्रतिदिन 145 मिनट डिजिटल मीडिया में बिता रहा है। दुनियाभर में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या लगभग 3 अरब 99 करोड़ तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि भारत में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या 60 करोड़ से ज्यादा है।

मीडिया फेस्ट में राम वाला हिंदुस्तान और राम मन्दिर

प्रथम दिवस के द्वितीय सत्र में रतलाम के लेखक एवं कवि अज़हर हाशमी ने 1974 में लिखी अपनी कविता “मुझको राम वाला हिंदुस्तान चाहिए” पेश की। इसके पश्चात हिरेन जोशी के साथ प्रो. संजय द्विवेदी ने “राम मंदिर- अहम, वहम और नियम” पर चर्चा की। जिसमें बोलते हुए द्विवेदी ने राम मंदिर के बारे अनेक जानकारियाँ दी और श्रोताओं के सवालों के जवाब में राम मंदिर के निर्माण और इतिहास के बारे बताया। उल्लेखनीय है कि 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद यह विषय अत्यधिक चर्चा में है।

आलोकनामा और राजस्थानी लोक संगीत

मालवा मीडिया फेस्ट के संध्याकालीन सत्र में मशहूर गजल लेखक आलोक श्रीवास्तव ने भी आलोकनामा पेश किया। रोचक शेरो शायरी के साथ आलोक ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को साझा किया। उन्होंने कहा कि वह भारत की भाषा बोलते हैं। उल्लेखनीय है उन्होंने बड़े शायरों की शागिर्दी की है और जगजीत सिंह पंकज उधास जैसे गायकों ने आलोक की रचनाओं को अपने स्वर दिए है। उन्होंने सवाल जवाब सत्र में कहा कि ”मैं हिंदी या उर्दू भाषा का कवि नहीं हूं बल्कि हिंदुस्तान का कवि हूं।” तथा यह भी बताया कि अच्छा लिखने के पहले काफी सारा अच्छा पढ़ना पढ़ेगा और अच्छे लोगों की संगत करनी पड़ेगी। अपने आस पास के माहौल को देखिए कि आप किसकी संगत में हो। इसके पश्चात प्रथम दिवस के रात्रिकालीन सत्र में राजस्थान के प्रसिद्द मांगणियार ग्रुप के मंजूर खान एवं उनके साथियों ने अपने मंत्रमुग्ध करने वाले लोक संगीत की शानदार प्रस्तुति दी। प्रसिद्ध गीतों एवं वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति पर दर्शकों को झूमने और नाचने पर मजबूर कर दिया।

मालवा एवं मीडिया पर चर्चारत पत्रकार एवं लेखक

मालवा एवं मीडिया पर बोले रतलाम के पत्रकार

मालवा मीडिया फेस्ट के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में “मालवा एवं मीडिया” विषय पर मालवा में मीडिया के विभिन्न आयामों और संभावनाओं पर चर्चा की। प्रसिद्ध यूट्यूबर रुचि श्रीमाली इस चर्चा की सूत्रधार थी। चर्चा में रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेश पुरी गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार नीरज शुक्ला, प्रसिद्ध लेखक आशीष दशोत्तर, वैदेही कोठारी और इंदौर के सोशल मीडिया ब्लॉगर अमन शामिल थे। चर्चा में “थिंक ग्लोबली एंड एक्ट लोकली”, मीडिया में स्थानीय मुद्दों एवं रोजगार युक्त संभावनाओं पर विभिन्न विचार प्रस्तुत किए गए