प्रगतिशील विधायक के प्रयासों पर पानी फेरती रतलाम की सरकार…

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News By – विवेक चौधरी (94251 03182)

रतलाम। किसी भी शहर की प्रगति में स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यदि दोनों का कार्य अच्छा हो तो शहर की व्यवस्थाएं और सुविधाएं बेहतर होती जाती है। लेकिन गाड़ी के जब दो पहियों में एक की रफ्तार धीमी हो तो इसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ता है। इसका उम्दा उदाहरण रतलाम शहर से जुड़े हुए कुछ लंबित कार्य है। शहर विधायक एवं मंत्री चेतन्य कश्यप अपनी प्रशासनिक सूझबूझ और दूरदर्शिता के लिए जाने जाते है। उन्होंने शहर के विकास की संभावनाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहर की सड़कों और शहर को जिले के अन्य स्थानों एवं अन्य जिलों से जोड़नी वाली सड़को के रूपांतरण पर पूरा ध्यान दिया है। लेकिन जब निर्माण कार्य से जुड़े विभाग और एजेंसियां ही विकास कार्य को लंबित कर प्रगति को पलीता लगाए तो उस शहर का भगवान ही मालिक रहेगा।

यहाँ हम बात कर रहे है शहर के कुछ ऐसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की, जो कब पूरी होगी शायद ही कोई बता सकता है। पहला यह कि क्या कोई जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी यह पक्के तौर पर बता सकता है कि जावरा फाटक से सेजावता फंटे तक बनने वाला सिटी फोरलेन पूरा बनेगा या नहीं बनेगा? क्योंकि अभी इस मार्ग पर जिस तरह से काम चल रहा है उससे तो इसका पुराना स्वरूप ही बेहतर लगता है। यदि गलती से यह कुछ वर्षों में बन भी जाए तो इसपर दो रेलवे पुलिया बननी बाकि है। और अगर ये कभी बने भी तो शायद आपकी अगली पीढ़ी इसका कार्य का समापन देखेगी। बात चुभने वाली जरूर है लेकिन क्या करें, है तो सच ही। आधी सड़क बनाकर जनता को आने जाने की सुविधा देने की जगह लगता है कि पूरी रोड खोदकर नई सड़क बनाने का कार्य करना ही भूल गए है। अगर किसी को यकीन ना हो तो एक बार जावरा फाटक अंडरब्रिज से सेजावता तक घूमकर आ जाए। स्टेशन, बस स्टैंड, औद्योगिक क्षेत्र, स्कूल, कॉलेज, सरकारी और गैरसरकारी आवासीय क्षेत्र बहुत कुछ इसी मार्ग से जुड़े है। समस्या यह है कि बस इस शहर के दमदार और जिम्मेदार लोगों की नजरें इनायत ही नहीं है इस पर। इस रात की सुबह कब होगी, सभी को इंतजार है।

उसी तरह क्या कोई जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी यह बता सकता है कि सुभाष नगर रेलवे ओवरब्रिज कब तक बन जायेगा? इस क्षेत्र की जनता को, जो रेल लाइन के इस पार और उस पार रहती है, आराम कब मिलेगा? अगर यह ओवरब्रिज बन जाए तो शायद सैलाना रोड ब्रिज पर दबाव और राम मंदिर चौराहे पर लगने वाले जाम के साथ साथ सागोद रोड पुलिया पर लगने वाले जाम से भी राहत मिले। जब सुभाष नगर रेलवे ब्रिज के बनने का ही ठिकाना नहीं है तो पटरी पार को पुराने शहर से जोड़ने वाले किसी दोपहिया वाहन पुल या मार्ग की कल्पना करना जीते जी स्वर्ग देखने से कम नहीं है। इन्ही दो परियोजनाओं की तरह यहाँ यह पूछा जाना भी लाज़मी है कि क्या कोई यह बता सकता है कि सागोद रोड पुलिया का काम कब खत्म होगा और यहाँ कभी भी लग जाने वाले ट्रैफिक जाम से जनता को मुक्ति मिलेगी? डोंगरेधाम कॉलोनी, सागोद रोड के भव्य मांगलिक भवन, धार्मिक स्थल, हॉस्पिटल इत्यादि को मुख्य बाजार से जोड़ने वाली यह सड़क भी भगवान भरोसे ही है। बहरहाल अभी निकट भविष्य में कोई चुनाव भी नहीं है जो इसे जल्दी पूरा करवाने के लिए दबाव बनाए। इसलिए शहरवासियों को आने वाले अनिश्चितकाल के लिए इस मार्ग पर और इस परियोजनाओं से होने वाले कष्ट को सहने के लिए मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से तैयार रहना चाहिए।