News By – विवेक चौधरी
- भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी की रतलाम शाखा के बहुचर्चित चुनाव सम्पन्न
- 10 संचालक पदों के लिए 26 प्रत्याशियों में था मुकाबला
- कुल मतदाताओं की तुलना में काफी कम मात्र 797 मतदान ही हुआ
- सभापति प्रितेश गादिया, उपसभापति सुशील मूणत एवं कोषाध्यक्ष संजय लुनिया हुए निर्वाचित
- लगातार दूसरी बार निर्दलीय के रूप में बरमेचा परिवार ने रेडक्रॉस सोसाइटी में अपनी दमदारी दिखाई
- निर्दलीय दिनेश बरमेचा 454 मतों के साथ सर्वाधिक पाँचवे स्थान पर रहे
- निर्दलीय दिनेश बरमेचा के अनुज नीरज बरमेचा भी पूर्व में निर्दलीय चुनाव जीत चुके है
रतलाम – रेडक्रास सोसायटी शाखा रतलाम की जिला शाखा की कार्यकारिणी समिति में संचालक पदों के लिए सोमवार 25 अगस्त को चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न हुई। निर्वाचित संचालकों ने निर्विरोध के साथ सभापति, उपसभापति तथा कोषाध्यक्ष भी चयन किया। उपरोक्त सभी निर्वाचन प्रक्रिया रतलाम के शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रतलाम में सम्पन्न हुई। चुनाव पूर्व नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया के पश्चात चुनाव मैदान में कुल 26 प्रत्याशी थे। बारिश और निर्माण कार्य की वजह से बाधित कॉलेज रोड के बावजूद भी उपस्थित मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
26 उम्मीदवारों में से प्रितेश महेंद्र गादिया प्रथम और निर्दलीय दिनेश बरमेचा पाँचवे स्थान पर रहें
निर्वाचन प्रक्रिया के लिए आशीष उपाध्याय को अधिकृत किया गया था, जिनकी उपस्थिति में मतदान संपन्न हुआ। मतगणना के परिणाम अनुसार सभी 26 प्रत्याशियों में से अधिकतम मत प्राप्त करने वाले 10 सदस्यों को भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी शाखा की प्रबंध समिति के संचालक के लिए निर्वाचित घोषित किया गया। जिसमें रेडक्रॉस सोसाइटी रतलाम के पूर्व पदाधिकारी एवं समाजसेवी दिवंगत महेंद्र गादिया के पुत्र प्रितेश गादिया को सर्वाधिक 609 मत मिले। तत्पश्चात चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सुशील मूणत को 490 मत, वरिष्ठ पत्रकार शरद जोशी को 474 मत, नेत्रदान से जुड़े हेमंत मूणत को 463 मत, दिवंगत समाजसेवी एवं भाजपा नेता कैलाश बरमेचा के पुत्र और निर्दलीय प्रत्याशी चिकित्सा सेवा क्षेत्र के दिनेश बरमेचा को 454 मत प्राप्त हुए। साथ ही संजय लूनिया 446 मत, डॉ सुलोचना शर्मा 428 मत, राजेश रांका 417 मत, सुनील पारिख 417 मत एवं अशोक संघवी (अशोक जैन लाला) को 393 मत प्राप्त होकर संचालक के रूप में निर्वाचित घोषित हुए।
आदर्श पैनल सहित अन्य 16 प्रत्याशियों को मिली निराशा
सेवा पैनल और आदर्श पैनल के 10-10 प्रत्याशियों के अलावा 6 अन्य प्रत्याशी चुनाव मैदान में हाथ आजमा रहे थे। जिसमें से सेवा पैनल के 9 और निर्दलीय दिनेश बरमेचा को सफलता हाथ लगी जबकि 16 अन्य प्रत्याशियों को निराशा हाथ लगी। इन 16 उम्मीदवारों में से अमित नागर को 145 मत, अमृत बिन्नी को 41 मत, आशीष घोटिकर को 114 मत, अंकित कटारिया को 201 मत, चैतन्य शर्मा को 90 मत, नरेंद्र अग्रवाल को 77 मत, डॉ प्रदीप जैन को 157 मत, मनोज उपाध्याय को 141 मत, महेंद्र भंडारी को 153 मत, राकेश पोरवाल को 270 मत, रितेश मेहता को 160 मत, विकास छाजेड को 171 मत, विजय पोरवाल को 317 मत, विजय शर्मा को 48 मत, सुनील शर्मा 108 मत, सुशील उपाध्याय को 95 मत ही प्राप्त हुए।
बरमेचा परिवार का पुनः कमाल जबकि गादिया परिवार की परम्परा कायम
प्रबंध समिति के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मिति से सभापति के लिए प्रितेश गादिया, उपसभापति के लिए सुशील मूणत एवं कोषाध्यक्ष के लिए संजय लुनिया को निर्वाचित किया गया। इसमें सभापति के रूप सेवा पैनल के प्रितेश के पिता दिवंगत महेन्द्र गादिया लंबे समय से रेडक्रॉस सोसाइटी से जुड़े पदाधिकारी रहें है। प्रितेश ने परिवार की परम्परा कायम रखी वहीं इस बार निर्वाचित संचालकों में से एक मात्र निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश बरमेचा के अनुज नीरज बरमेचा पिछली बार वर्ष 2015 में हुए चुनाव में भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप चुनाव जीत कर धमाका कर चुके थे। एक दशक पूर्व नीरज बरमेचा अपनी युवावस्था में ही संचालक का चुनाव जीतने का कमाल दिखा चुके है।

अव्यवस्थाओं और आपत्तियों से घिरा रही यह रेडक्रॉस सोसाइटी की चुनाव प्रक्रिया
प्रशासन की ओर से जनसंपर्क विभाग के माध्यम से बताया गया था कि निर्वाचन हेतु उम्मीदवारों से नामांकन पत्र 25 अगस्त को प्रातः 11 बजे से 12 बजे तक प्राप्त किए जाएंगे। प्राप्त नामांकन पत्रो की संवीक्षा दोपहर 12:00 बजे से 12ः15 बजे तक की मात्र 15 मिनिट में की जाएगी। नाम वापसी का समय दोपहर 12:15 से 12:45 बजे तक दिया गया था। मतदान दोपहर 01:30 बजे से 04:00 बजे तक रखा गया था जो कि मात्र ढाई घण्टे था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस चुनाव में लगभग 3000 से अधिक मतदाता पंजीकृत थे। कई फर्म एवं संस्था सदस्य के रूप में दिखाई गई थी जबकि यह स्पष्ट नहीं था कि फर्म या संस्था की ओर से अधिकृत व्यक्ति कौन होगा। कई मतदाता दिवंगत हो चुके थे। वरिष्ठ समाजसेवी गोविंद काकानी का अनुज गोपाल काकानी जो पिछले चुनाव में मतदान कर चुके थे इस बार उनका नाम मतदाताओं की सूची में नहीं था। मनोहर पोरवाल के सुपुत्र विपिन पोरवाल भी वोट डालने से वंचित रहे| आरोप यह भी लगे कि कुछ वार्षिक सदस्यों को मताधिकार दे दिया गया जबकि कुछ आजीवन सदस्य मताधिकार से वंचित रह गए। कुछ के नाम एक से अधिक बार सूची में है।
लगभग 25% मतदान के साथ कई अन्य प्रश्न भी है चुनाव प्रक्रिया पर
बताया जा रहा है कि आपत्ति राज्यपाल महोदय तक पहुँचाई गई, जिसके जिले के बड़े अधिकारी नाराज दिखे। आपत्तियाँ भी वाजिब ही थी। मात्र 45 मिनिट की जानकारी में मतदाता प्रत्याशियों के बारे में कैसे निर्णय तय करेंगे? 3000 से अधिक मतदाताओं में से पूरे 800 मतदाताओं ने भी भाग नहीं लिया। क्या चुनाव कराने वाले यह सब पहले से ही जानते थे इसलिए मतदान के लिए भी कम समय ही दिया? मतदान किस कक्ष में होगा इसके लिए मतदाता पर्ची के लिए लाइन में लगकर परेशान होते रहें। प्रत्याशी मतदान कक्ष के बाहर खड़े होकर मतदाताओं से निवेदन करते दिखे। जबकि यदि चुनाव प्रक्रिया को पर्याप्त समय दिया जाता, सूचना और बेहतर तरीके से प्रसारित प्रचारित किया जाता तो प्रत्याशियों को अपने प्रचार में और मतदाताओं तक पहुँचने के लिए पर्याप्त समय मिलता। लगभग 25% मतदान चुनाव आयोजको के लिए शर्म और समीक्षा का विषय होना चाहिए।
इससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि इसके पूर्व वर्ष 2015 में चुनाव हुए थे और वर्ष 2018 में निर्वाचित मंडल को भंग कर दिया गया था। उसके बाद अब चुनाव किये गए है। अब जानना यह होगा कि दस वर्ष बाद हुए यह चुनाव आने वाले कितने समय तक रहेंगे या समय पूर्व ही भंग कर दिए जाएंगे?



