News By – विवेक चौधरी
रतलाम। रतलाम के शासकीय मेडिकल कॉलेज पर गंभीर संकट आ गया है। यह संकट राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) द्वारा डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम को जारी किए गए एक कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) और उससे जुड़ी कमियों की रिपोर्ट (Deficiency Report) को लेकर है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉ. अनिता मूथा जो मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अधिष्ठाता, शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम के पद पर आसीन है, उन्होंने अस्पताल अधीक्षक, विभिन्न शाखाओं के प्रभारी अधिकारी जैसे स्थापना, लाइब्रेरी, ई-औषधि, AEBAS, MRD, स्किल लैब, फायर सेफ्टी और विभागाध्यक्ष (एनाटॉमी एवं रेडियोडायग्नोसिस) NMC से मिले “कारण बताओ नोटिस” का हवाला देते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया था कि वे अपनी-अपनी कमियों पर स्पष्टीकरण तैयार कर 24 जून 2026 को सुबह 11:00 बजे तक NMC शाखा में जमा करें, ताकि समय सीमा (3 कार्य दिवस) के भीतर NMC को जवाब भेजा जा सकें।
बताया जा रहा है कि NMC के कारण बताओ नोटिस में मेडिकल कॉलेज द्वारा प्रस्तुत किए गए वार्षिक प्रकटीकरण डेटा के मूल्यांकन में पोर्टल ऑडिट, बायोमेट्रिक उपस्थिति/AEBAS लॉग, परीक्षा वीडियो रिकॉर्डिंग आदि में न्यूनतम मानकों के मुकाबले कई गंभीर कमियां पाई गई थी।
NMC ने चेतावनी देते हुए कॉलेज से 3 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है कि क्यों न उनकी आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MBBS सीटों की संख्या घटा दी जाए? या नियमों के तहत रुपये 1 करोड़ तक का आर्थिक जुर्माना लगाया दिया जाए? जवाब न देने पर इसे अंतिम अवसर मानकर एकतरफा दंडात्मक कार्यवाही भी संभावित थी।

सूत्रों से प्राप्त “कमियों की रिपोर्ट” के अनुसार कॉलेज में कुल मिलाकर कई स्तरों पर विफलताएं पाई गई हैं। संस्थान/इन्फ्रास्ट्रक्चर, फायर सेफ्टी, टीचिंग फैसिलिटी, लाइब्रेरी में जर्नल, स्किल लैब एरिया और क्षमता, डिसेक्शन हॉल एरिया, और हॉस्टल क्षमता में कमी पाई गई है। लेक्चर थियेटर की क्षमता भी मानक से कम है। यहीं नहीं विभाग-वार सुविधाएं व क्लिनिकल मटेरियल, इंटीग्रेटिव मेडिकल रिसर्च विभाग और डिजिटल रिकॉर्ड रूम उपलब्ध नहीं होना जैसे विषय भी NMC के नाराज़गी का कारण है। आम मरीजों से जुड़ी एक्स-रे मशीन/इमेजिंग सुविधा भी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है।
OPD में मरीजों की उपस्थिति और कैमरों की संख्या कम बताई गई है। छात्रों के लिए AEBAS उपस्थिति लागू नहीं है। गंभीर विषय यह है कि टीचिंग फैकल्टी की कमी पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। NMC के नोटिस में लगभग सभी मुख्य विभागों जैसे एनाटोमी, एनेस्थीसियोलॉजी, कम्यूनिटी मेडिसिन, जनरल मेडिसिन एवं सर्जरी, पैथोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, रेडियो डायग्नोसिस आदि) में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजिडेंट्स के पदों पर भारी कमी पाई गई है।

बताया जा रहा है कि सुधार के आश्वासन पर NMC ने कुछ दिनों की मोहलत दी है। मेडिकल कॉलेज वाले जहाँ सीट बढ़वाने की जुगाड़ में थे वहाँ दाँव उल्टा पड़ गया और मान्यता ही खतरे में आ गई। उल्लेखनीय है कि मेडिकल कॉलेज पर पहले भी गंभीर आरोप लगते रहें है। चाहे वो सामान्य दवाइयों की उपलब्धता की हो या मरीजों की सोनोग्राफी और CT स्कैन जाँचो की। मरीजों की सुविधाओं के अव्यवस्थाओं और एम्बुलेंस को लेकर शिकायतें अब सामान्य से बात लगती है। सेफ्टी सर्टिफिकेट की अनुपलब्धता की चर्चा अंदरखाने के गलियारों में गूँजती रहती है। प्रश्न यह है कि दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रारम्भ हुए इस मेडिकल कॉलेज की यह स्थिति कैसे बनी? आखिर शहर और जिले के जिम्मेदार भी इसकी छवि सुधार क्यों नहीं पाए? अब देखना दिलचस्प होगा मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन नोटिस के आधार पर क्या क्या सुधार करेगा? क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस संकट से आसानी से उबर पाएगा या नहीं? इस घटना से कितना सबक लेगा?



